LPG Crisis: देश भर में एलपीजी की किल्लत के कारण, कई लोग कोयले का रुख कर रहे हैं। कभी कोयला सिर्फ बैकअप के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। अब वो कई होटलों और यहां तक कि घरों के लिए भी मुख्य ईंधन बनता जा रहा है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में कोयला बेचने वालों ने भारी मांग की खबर दी है, क्योंकि लोग अब कोयले का स्टॉक जमा कर रहे हैं।जिन होटलों और रेस्त्रां ने कभी कोयले को अलविदा कह दिया था, कमर्शियल गैस की आपूर्ति में रुकावट के बाद अब वही अपनी दुकानें चलाने के लिए फिर से कोयले का स्वागत कर रहे हैं।LPG Crisis:
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खाना पकाने के लिए कोयले की मांग इतनी बढ़ रही है कि कई लोगों के लिए इसकी आपूर्ति करना मुश्किल है। मांग ज्यादा है और आपूर्ति कम, जिससे कोयले की कीमत भी बढ़ गई है।इस बीच, आपूर्तिकर्ताओं का कहना है कि ये कमी मुख्य रूप से परिवहन में देरी के कारण है। कोयला मुख्य रूप से झारखंड से आता है और ट्रकों को पहुंचने में लगभग एक सप्ताह का समय लगता है।एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत के कारण कई घरों के लिए भी कोयला अनिवार्य बनता जा रहा है। लोगों का कहना है कि उनके सिलेंडर खत्म हो गए हैं और उन्हें एलपीजी रिफिल के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। लिहाजा वे कोयले पर खाना पकाने को मजबूर हैं।LPG Crisis:
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वाराणसी में भी कई होटलों और घरों में कोयले पर खाना बनना शुरू हो रहा है। जैसे-जैसे गैस सिलेंडर खत्म हो रहे हैं, कोयले के चूल्हे बेचने वाली दुकानों पर लोगों की कतारें लंबी होती जा रही हैं। लोग इस उम्मीद में चूल्हे खरीद रहे हैं कि मुश्किल वक्त में भी वे अपने परिवारों को खाना खिला सकेंगे।कोयले के चूल्हे बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि भारी मांग को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। ये चूल्हे ज्यादातर हाथ से बने होते हैं और इन्हें कुछ ही कारीगर बनाते हैं।साफ है कि भोजन पकाने के लिए अब कई व्यवसायों और घरों का प्राथमिक ईंधन कोयला बनता जा रहा है। देश के कई हिस्सों में एलपीजी की कमी जारी है। लिहाजा घर हों या होटल, रसोई की आग जलाए रखने के लिए भारी संघर्ष करना मजबूरी है।LPG Crisis:
