MP News : खंडवा के कोलगांव में स्वामित्व योजना की सूची सामने आने के बाद मामला खुला. रिकॉर्ड में तत्कालीन पटवारी राजेश मंडलोई के नाम 48 और उनकी पत्नी के नाम 3 संपत्तियां दर्ज मिलीं. शिकायत के बाद पटवारी को निलंबित कर दिया गया.
News Desk : मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के कोलगांव में जमीनों के रिकॉर्ड को लेकर गंभीर गड़बड़ी का मामला सामने आया है. स्वामित्व भू-अधिकार निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 के तहत जारी सूची की जांच के दौरान तत्कालीन पटवारी राजेश मंडलोई और उनकी पत्नी मनीषा मंडलोई के नाम कुल 51 संपत्तियां दर्ज मिलीं. इनमें 48 संपत्तियां राजेश मंडलोई और 3 उनकी पत्नी के नाम बताई गई हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि रिकॉर्ड में उनके घरों के बीच का साझा आंगन, आने-जाने के रास्ते, खुली जमीन, सार्वजनिक उपयोग की जमीन और अन्य जगहें भी पटवारी के नाम दर्ज हो गईं. योजना के तहत कोलगांव में कुल 935 पट्टों की सूची सामने आई थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने अपने आसपास की जमीनों के रिकॉर्ड की जांच शुरू की. MP News
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मामले में एक प्रमुख विवाद खसरा नंबर 623 को लेकर है. ग्रामीणों के मुताबिक, इस जमीन पर बलाही समाज के लोगों ने चंदा जुटाकर मांगलिक भवन का निर्माण शुरू किया था और प्लिंथ लेवल तक काम हो चुका था. रिकॉर्ड में जमीन का नाम पटवारी के नाम सामने आने के बाद विवाद की आशंका में निर्माण रोक दिया गया. इसी तरह ग्रामीणों ने एक साझा आंगन और वर्षों पुरानी बावड़ी वाली जमीन को लेकर भी आपत्ति जताई. शिकायत के बाद वर्तमान पटवारी राकेश पटेल ने ग्रामीणों की मौजूदगी में संबंधित खसरों का मिलान किया. रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कई रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर सामने आने की बात कही गई. बस स्टैंड के सार्वजनिक चबूतरे सहित कुछ अन्य जमीनों को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं. MP News
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स्वामित्व योजना की प्रक्रिया में सर्वे के बाद ग्राम स्तर की समिति प्रारूप तैयार करती है. इसमें सरपंच, सचिव, पटवारी और अन्य सदस्य शामिल होते हैं. इसके बाद संबंधित अधिकारी प्रारूप का परीक्षण करते हैं, दावे-आपत्तियां मंगाई जाती हैं और अंतिम सूची के लिए अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी होती है. ऐसे में एक ही कर्मचारी और उसके परिवार के नाम 51 संपत्तियां दर्ज होने को लेकर प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं. मामले की जांच के बाद नायब तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन पटवारी राजेश मंडलोई को मध्य प्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम, 1966 के नियम-9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है. अब रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इसमें अन्य स्तरों की क्या भूमिका थी, इसकी जांच आगे की कार्रवाई का आधार बनेगी. MP News
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