Shaheed Diwas: आजादी के बाद हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू ने देश के लिए हंसते-हंसते फांसी का सामना किया था। दिल्ली की गलियों में आज भी उनकी यादें ताजा हैं, जहां उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाई थी।
दिल्ली के कई स्थानों पर भगत सिंह और उनके साथी क्रांतिकारियों ने गुप्त बैठकों का आयोजन किया था। इनमें से एक है फिरोज शाह कोटला फोर्ट, जहां हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की बैठकों में अंग्रेजों के खिलाफ योजनाएं बनाई जाती थीं। दूसरा केंद्रीय विधानसभा, इसमें भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने बम फेंककर अंग्रेजों को जगाने का प्रयास किया था, जो आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। तीसरा है कश्मीरी गेट, जो क्रांति का प्रवेश द्वार कहा जाता है, जहां से कई क्रांतिकारी अंग्रेजों की नजरों से बचकर निकलते थे।
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Shaheed Diwas- चौथा पुरानी दिल्ली केंद्रीय कारागार, इसमें भगत सिंह और उनके साथियों को कैद किया गया था, जहां उन्होंने हंसते-हंसते फांसी का सामना किया। पांचवा कुदसिया बाग, यहां कई गुप्त मुलाकातें होती थीं, जहां क्रांति की योजनाएं तैयार की जाती थीं। छठां पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, इसको क्रांतिकारियों की गुप्त यात्राओं का केंद्र माना जा सकता है, जहां क्रांतिकारी अक्सर अपनी पहचान छुपाकर सफर करते थे। और सातवां दरियागंज, जो विचारों की जन्मस्थली कहा जा सकता है, जहां क्रांतिकारी साहित्य छपता और फैलता था।
