कथित पेगासस जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश दिया है, जिसमें कहा गया है कि पेगासस जासूसी मामले की जांच एक्सपर्ट कमेटी करेगी। कोर्ट में दायर याचिकाओं में स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। चीफ जस्टिस की बेंच ने इस पर बुधवार को फैसला सुनाया।
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कोर्ट ने कहा कि लोगों की विवेकहीन जासूसी बिल्कुल मंजूर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरवी रविंद्रन की अगुवई में इस कमेटी का गठन किया गया है। इनके अलावा इस कमेटी में आलोक जोशी और संदीप ओबरॉय भी होंगे। एक्सपर्ट कमेटी में साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक एक्सपर्ट, आईटी और तकनीकी विशेषज्ञों से जुड़े लोग भी शामिल किए गए हैं।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार का कोई साफ स्टैंड नहीं था। पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि ये सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं है और न ही ये राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में है। इस मामले में चीफ जस्टिस की बेंच ने 13 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और कहा था कि वह केवल यह जानना चाहती है कि क्या केंद्र ने नागरिकों की कथित जासूसी के लिए अवैध तरीके से पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है या नहीं? आपको बता दें कि पेगासस जासूसी मामले में निष्पक्ष जांच के लिए अलग-अलग 15 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। ये याचिकाएं वरिष्ठ पत्रकार एन राम, सांसद जॉन ब्रिटास और यशवंत सिन्हा समेत कई लोगों ने दायर की थी।
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