Tea In Plastic Cups : सुबह की भागदौड़ हो या ऑफिस में काम का दबाव, एक कप गरमा-गरम चाय थकान दूर करने का सबसे आसान तरीका मानी जाती है। सड़क किनारे ठेले से लेकर दफ्तर के बाहर तक, पतले प्लास्टिक कप या पॉलिथीन की थैली में मिलने वाली चाय आम दृश्य है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह सुविधा आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है?
प्लास्टिक कप में क्यों खतरनाक? – जब बहुत गरम चाय (अक्सर 60–90 डिग्री सेल्सियस) पतले या कम गुणवत्ता वाले प्लास्टिक कप में डाली जाती है, तो प्लास्टिक की संरचना कमजोर पड़ने लगती है। इस दौरान उसमें मौजूद कुछ रसायन पेय में घुल सकते हैं।
ये रसायन शरीर में जाकर हार्मोन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इन्हें “एंडोक्राइन डिसरप्टर्स” कहा जाता है, क्योंकि ये शरीर के प्राकृतिक हार्मोन की नकल करके या उनके काम में बाधा डालकर असंतुलन पैदा कर सकते हैं।Tea In Plastic Cups Tea In Plastic Cups Tea In Plastic Cups
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- शरीर पर क्या पड़ सकता है असर? – आपको बता दें कि बार – बार रसायनों के संपर्क में आने से शरीर में धीरे -धीरे नकारात्मक प्रभाव जमा हो सकता है. प्लास्टिक कप में बार- बार पीने से आपके शरीर पर निम्न असर पड़ता हैं जैसे-
* हार्मोन असंतुलन
* थायरॉइड की गड़बड़ी
* इंसुलिन रेजिस्टेंस
* टाइप-2 डायबिटीज का खतरा
* वजन बढ़ना और मेटाबॉलिज्म धीमा होना
* महिलाओं और पुरुषों में प्रजनन संबंधी समस्याएं
* नींद में बाधा और लगातार थकान
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रोजाना की छोटी आदत, बड़ा जोखिम- कुछ लोगों को दिन में 2- 4 बार प्लास्टिक कप में चाय पीनी पड़ती हैं. चाहें आप हर बार थोड़ी मात्रा में सेवन करे लेकिन लगातार सेवन से शरीर पर इसका संचयी (क्यूम्युलेटिव) असर हो सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे “साइलेंट हेल्थ रिस्क” मानते हैं जो तुरंत नजर नहीं आता, लेकिन लंबे समय में गंभीर परिणाम दे सकता है।
