UGC Rules: सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026’ पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह फैसला आज तब आया, जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने अहम सुनवाई की।UGC Rules:
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सुप्रीम कोर्ट ने इन नए नियमों को प्रथम दृष्टया अस्पष्ट (vague) और दुरुपयोग की आशंका से भरा बताया है। कोर्ट ने साफ कहा कि ये प्रावधान समाज को बांट सकते हैं और देश को कास्टलेस सोसाइटी की ओर बढ़ने के 75 साल के प्रयासों को पीछे धकेल सकते हैं। नए नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को गैर-समावेशी माना गया, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों को संस्थागत सुरक्षा से वंचित किया जा रहा था। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और UGC एक्ट 1956 का उल्लंघन करते हैं।UGC Rules:
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फैसले के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की है कि “हम एक क्लासलेस सोसाइटी की ओर बढ़ रहे थे… क्या हम इन नियमों से पीछे जा रहे हैं? क्या ये समाज को और ज्यादा रिग्रेसिव बना देंगे?”कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया है। नए नियमों को रिड्राफ्ट करने का निर्देश दिया गया है। तब तक 2012 के पुराने UGC नियम लागू रहेंगे। अब अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी।देशभर में छात्रों ने इन नए नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किए थे। कई कैंपस में छात्रों ने इसे विभाजनकारी बताया। आज फैसले के बाद छात्रों ने इसे छात्र आंदोलन की जीत करार दिया है और नारे लगाए और “छात्र एकता जिंदाबाद के नारे लगाए”। UGC Rules:
बहरहाल यह फैसला सरकार के लिए बड़ा झटका है, जबकि विरोध करने वाले छात्रों और सामान्य वर्ग के लिए राहत की बात है। विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियमों में भेदभाव रोकने के अच्छे इरादे थे, लेकिन भाषा और परिभाषा में कमी से विवाद बढ़ा। अब केंद्र को विशेषज्ञ समिति बनाकर नियमों को संतुलित बनाने की चुनौती है।UGC Rules:
