पंजाब: फगवाड़ा में RTI कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या, विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा

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जालंधर के RTI कार्यकर्ता सिमरनजीत सिंह की शनिवार को सतनामपुरा थाना क्षेत्र के महेरू गांव के पास कथित तौर पर उनके ममेरे भाई ने वित्तीय विवाद के चलते गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने यह जानकारी दी। जालंधर परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) नवीन सिंगला ने बताया कि सिंह के शव के पास से 32 बोर की एक पिस्तौल बरामद हुई, जबकि घटनास्थल के पास खड़ी एक एसयूवी में 12 बोर की राइफल मिली। उन्हें सिर में बहुत करीब से गोली मारी गई थी।

पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) सिंगला ने यहां संवाददाताओं को बताया कि हत्या के मामले में मृतक के ममेरे भाई शरणजीत सिंह उर्फ ट्विंकल को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि 32 बोर की पिस्तौल और छह कारतूस भी बरामद किए गए हैं। डीआईजी ने बताया कि यह घटना दोनों रिश्तेदारों के बीच वित्तीय विवाद के कारण हुई। दोनों रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े थे और शनिवार सुबह महेरू गांव में एक भूखंड का निरीक्षण करने गए थे।

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उन्होंने बताया कि सिमरनजीत अपनी एसयूवी से पहुंचे थे, जबकि शरणजीत पांच साथियों के साथ कार में आया था। पुलिस के अनुसार, दोनों के बीच बकाया रकम को लेकर कहासुनी हुई। जांच में सामने आया है कि सिमरनजीत पर शरणजीत के लगभग पांच लाख रुपये बकाया थे।

पुलिस ने बताया कि जब सिमरनजीत महेरू गांव में लॉ गेट के पास स्थित भूखंड पर खड़े थे, तभी शरणजीत ने पीछे से उन पर गोली चला दी। सिमरनजीत के सिर में दो गोलियां लगीं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। गोलीबारी के बाद शरणजीत अपने साथियों के साथ घटनास्थल से फरार हो गया। हत्या की सूचना मिलते ही सिंगला कपूरथला एसएसपी गौरव तोरा के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने मृतक के शव के पास से उसके दो मोबाइल फोन भी बरामद किए।

डीआईजी ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पेशे से वकील सिंह आरटीआई और पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिकाएं दायर करने के लिए जाने जाते थे। पिछले महीने उन्होंने ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ नामक कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी।

उनकी हत्या पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर आम आदमी पार्टी (एएपी) सरकार पर निशाना बनाया। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने उनकी हत्या की निंदा की और आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार के तहत पंजाब में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।

उन्होंने कहा, “आज पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के अलावा कोई भी सुरक्षित नहीं है,” और साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मान केवल इसलिए सुरक्षित हैं क्योंकि सैकड़ों पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे उनकी सुरक्षा कर रहे हैं। वडिंग ने कहा कि पंजाब में चाहे अपराधी हों, गुंडे हों या आतंकवादी, किसी को भी कानून का डर नहीं है।

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उन्होंने कहा कि कुछ ही दिन पहले अमृतसर में एक एएसआई की गोली मारकर हत्या कर दी गई और पुलिस अभी भी “बेखबर” है। उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि मुख्यमंत्री मान जिम्मेदारी स्वीकार करें, क्योंकि वे न केवल सरकार के मुखिया हैं, बल्कि गृह विभाग के भी प्रमुख हैं, जो राज्य की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है।” वडिंग ने कहा कि स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।

उन्होंने कहा, “अब मुख्यमंत्री को कार्रवाई करनी चाहिए, लोगों की जान जाते देख वे सिर्फ अपनी सुरक्षा व्यवस्था की आड़ में नहीं छिप सकते।” शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी हत्या की घटना की निंदा की। बादल ने कहा, “यह लोकतंत्र और पारदर्शिता पर सीधा हमला है। इससे पहले जालंधर शहर में उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें वे बाल-बाल बचे थे। पता चला है कि वे वही वकील हैं जिन्होंने जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 को चुनौती देते हुए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, इस घटना की एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा गहन जांच की आवश्यकता है।”

पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि यह एक और क्रूर उदाहरण है जो यह दर्शाता है कि भगवंत मान सरकार के शासन में कानून व्यवस्था किस प्रकार “पूरी तरह चरमरा गई” है। बाजवा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “गुंडों से लेकर शूटरों तक, अपराधी बेखौफ होकर काम कर रहे हैं जबकि सरकार प्रचार और सुर्खियों में व्यस्त है। पंजाब न्याय, सुरक्षा और जवाबदेही का हकदार है। इस सरकार के जागने से पहले और कितनी जानें जाएंगी?”

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