Science News: अक्सर हमने सुना है कि मृत्यु के बाद सब खत्म हो जाता है। मृत्यु से जन्म होने वाली बात तो लगभग असंभव सी लगती है, लेकिन अंगदान इस बात का प्रमाण है कि मृत्यु के बाद भी मनुष्य के अंग काम करते हैं। ये किसी दूसरे व्यक्ति को नया जीवन जरूर प्रदान कर सकते हैं। जैसे टैडपोल से मेंढक का जन्म, कैटरपिलर से तितली का रूप कुछ ऐसे बदलाव हैं जिनसे हम सभी रूबरू हैं।
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एक रिसर्च में यह जानने की कोशिश की गई कि मरने के बाद जीवों के अंग किस प्रकार काम करते हैं। जिसमें एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पाया गया कि कुछ कोशिकाएं मृत्यु के बाद भी बहुकोशिकीय जीवों में बदलाव करने की क्षमता रखती है।
बता दें कि रिसर्चर्स ने मृत मेंढक भ्रूण की त्वचा निकाली और त्वचा कोशिकाओं को लैब में रखा गया। ये कोशिकाएं परिस्थितियों के अनुकूल ढ़लने में सक्षम थी। बिना किसी बाह्य सहायता से ये कोशिकाएं बहुकोशिकीय जीवों में पुनर्गठित हो गई। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि नई जीवों का व्यवहार उनकी मूल जैविक भूमिकाओं से अलग था। इन जीवों को जेनोबॉट कहा जाता है। ये अपने सिलिया- छोटे बालों की मदद से ये वातावरण को नेविगेट करते थे। साथ ही आगे बढ़ने के लिए भी इन्हीं बालों का प्रयोग करते थे।
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ये ज़ेनोबोट्स बिना बढ़े भी अपनी संरचना और कामों को शारीरिक रूप से पूरा कर सकते हैं। साथ ही मानव फेफड़ों की कोशिकाएं खुद ही समय के साथ लघु बहुकोशिकीय जीवों में बदल जाती है और जीव के शरीर में इधर-उधर घूम सकती है। इस रिसर्च से यह बात सामने आई कि कोशिकीय व्यवस्था कितनी लचीली होती है। केवल निर्धारित तरीके से ही जीव विकसित होते हैं, यह इस बात पर सवाल खड़ा कर देती है।
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