देश के सर्वोच्च सम्मानों पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित बिहार कोकिला स्व. शारदा सिन्हा का पटना में आज सुबह गुलाबी घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हो गया है। शारदा जी दुनिया को अलविदा कहकर अब पंचतत्व में विलीन हो गई हैं। उनके बेटे अंशुमन ने उन्हें मुखाग्नि दी है। उनकी अंतिम यात्रा में उन्हें नम आंखों से विदाई देने के लिए उनके परिजन, रिश्तेदार, कई मशहूर संगीतकार और कई दिग्गज नेता शामिल हुए, वहीं स्वर कोकिला के अंतिम संस्कार में हजारों की भीड़ देखने को मिली।
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बिहार कोकिला के नाम से मशहूर लोक गायिका शारदा सिन्हा का पार्थिव शरीर बुधवार को पटना पहुंचा था। इसके बाद पटना स्थित उनके आवास पर बिहार CM समेत कई नेताओं, कई मशहूर हस्तियों और हजारों लोगों ने उनके अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद गुलाबी घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, इस दौरान उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए हजारों का संख्या में लोगों का हुजूम उमड़ा।
गौरतलब है, ‘बिहार कोकिला’ के नाम से मशहूर लोक गायिका शारदा सिन्हा का 72 साल की उम्र में मंगलवार रात दिल्ली के एम्स में निधन हो गया था। उनके निधन से संगीत इंडस्ट्री एवं फिल्म इंडस्ट्री, राजनीतिक गलियारे समेत पूरे बिहार और देश में शोक की लहर दौड़ गई थी। फिलहाल अब उनके गाए गीत ही अब उनकी याद दिलाया करेंगे।
बिहार की समृद्ध लोक परंपराओं को राज्य की सीमाओं से बाहर भी लोकप्रिय बनाने वालीं शारदा सिन्हा के कुछ प्रमुख गीतों में ‘‘छठी मैया आई ना दुआरिया’’, ‘‘कार्तिक मास इजोरिया’’, ‘‘द्वार छेकाई’’, ‘‘पटना से’’, और ‘‘कोयल बिन’’ शामिल थे। इसके अलावा उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों में भी गाना गया था। इनमें ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर- टू’ के ‘तार बिजली’, ‘हम आपके हैं कौन’ के ‘बाबुल’ जैसे गाने शामिल हैं।
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शारदा सिन्हा के छठ पूजा के लिए गाए गीत भी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। उनका निधन छठ महापर्व के पहले दिन हुआ। छठ घाटों पर उनके गाये गीत जरूर बजाए जाते हैं। शरदा सिन्हा ट्रेंड शास्त्रीय गायिका थीं, जिन्होंने अपने कई गीतों में लोक संगीत का मिश्रण किया। उन्हें अक्सर ‘मिथिला की बेगम अख्तर’ कहा जाता था। वे हर साल छठ पर्व पर नया गीत जारी करती थीं। उन्होंने इस साल स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद छठ पर्व के लिए गीत जारी किया था। सुपौल में जन्मीं सिन्हा छठ पूजा और विवाह जैसे अवसरों पर गाए जाने वाले लोकगीतों की वजह से अपने गृह राज्य बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बेहद लोकप्रिय थीं।
