CSPOC: भारत एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी लोकतांत्रिक शक्ति का प्रदर्शन करेगा। ‘लोकतंत्र की जननी’ कहा जाने वाला भारत, आगामी 14 से 16 जनवरी तक 28वें राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (CSPOC) की मेजबानी करने जा रहा है। इसी के साथ देश की राजधानी नई दिल्ली एक एक ऐतिहासिक संसदीय महाकुंभ की साक्षी बनने जा रही है। 14 जनवरी से शुरू हो रहे इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर के लोकतांत्रिक मूल्यों की झलक देखने को मिलेगी। CSPOC:
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इस सम्मेलन में 60 से अधिक राष्ट्रमंडल देशों और संसदों के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी हिस्सा लेंगे।प्रधानमंत्री,नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।पीएम का संबोधन भारत के संसदीय सफर और वैश्विक लोकतंत्र में इसकी भूमिका पर केंद्रित होगा।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, इस 28वें CSPOC के अध्यक्ष के रूप में कार्यक्रम की कमान संभाल रहे हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस कार्यक्रम की ज्यादा जानकारी को लेकर कल सोमवार 12 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित करेंगे। CSPOC:
यह आयोजन न केवल भारत की संसदीय यात्रा के लिए एक अहम पड़ाव है, बल्कि यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रति वैश्विक विश्वास को भी दर्शाता है। तीन दिनों तक चलने वाली इस चर्चा में विधायी प्रक्रियाओं को सशक्त बनाने और लोकतांत्रिक ढांचे को आधुनिक चुनौतियों के लिए तैयार करने पर मंथन होगा। CSPOC:
