भारत और ओमान की साझा समुद्री विरासत का जश्न मनाते हुए INSV कौंडिन्य पहुंचा मस्कट

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भारतीय नौसेना के पोत कौंडिन्य ने पोरबंदर से अपनी पहली यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की है और आज मस्कट पहुँच गया है। पारंपरिक रूप से निर्मित इस पालयुक्त पोत की यात्रा भारत और ओमान के बीच 5,000 वर्षों से अधिक पुराने गहरे समुद्री, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का एक सशक्त प्रतीक है। यह इस तथ्य को भी उजागर करता है कि महासागर अवरोध नहीं बल्कि संपर्क के गलियारे हैं, जो दोनों देशों के बीच निरंतर संपर्क को संभव बनाते हैं। यह यात्रा विशेष महत्व रखती है क्योंकि दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।

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इस परियोजना की परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी और इसे नौसेना वास्तुकारों, पुरातत्वविदों, पारंपरिक जहाज निर्माण डिजाइनरों और कुशल जहाज निर्माताओं के सहयोग से भारतीय नौसेना द्वारा कार्यान्वित किया गया। INSV कौंडिन्य, अजंता गुफा चित्रों में चित्रित पांचवीं शताब्दी ईस्वी के एक जहाज से प्रेरित है और इसका निर्माण प्राचीन भारतीय जहाज निर्माण तकनीकों का उपयोग करके किया गया है, जिसमें आधुनिक कीलों या धातु के बंधनों के बिना सिले हुए तख्तों का निर्माण शामिल है। प्रसिद्ध भारतीय नाविक कौंडिन्य के नाम पर नामित यह जहाज भारत के स्वदेशी समुद्री ज्ञान, शिल्प कौशल और टिकाऊ प्रथाओं का प्रदर्शन करता है।

आज मस्कट के सुल्तान काबूस बंदरगाह पर जहाज और उसके चालक दल का स्वागत भारत के बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने किया। बंदरगाह पर आयोजित स्वागत समारोह में ओमान के विरासत एवं पर्यटन मंत्रालय के पर्यटन उप सचिव महामहिम अज़्ज़ान अल बुसैदी और भारतीय नौसेना, ओमान की राज नौसेना, ओमान की राज पुलिस तटरक्षक बल और अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। छात्रों सहित समाज के सभी वर्गों से जुड़े एक बड़े भारतीय समुदाय ने उत्साहपूर्वक जहाज का स्वागत किया। जहाज के आधिकारिक स्वागत समारोह के दौरान पारंपरिक भारतीय और ओमानी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।

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सितंबर 2023 में निर्माण कार्य शुरू होने से लेकर मई 2025 में भारतीय नौसेना में इसके शामिल होने तक, इस पहल ने लगभग विलुप्त हो चुकी जहाज निर्माण की परंपरा को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित किया। भविष्य की दृष्टि से देखें तो, भारत और ओमान बेहतर कनेक्टिविटी, सुरक्षित समुद्री संचार मार्गों और नीली अर्थव्यवस्था में उभरते अवसरों पर आधारित समुद्री सहयोग का विस्तार कर रहे हैं।

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