Manipur: मणिपुर के दो नागरिक समाज संगठनों ने सोमवार 2 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मांग की कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कुकी-जो उग्रवादी समूहों के साथ किए गए अभियान निलंबन (एसओओ) समझौते का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। पिछले साल चार सितंबर को दो प्रमुख कुकी-जो समूहों ने सरकार के साथ पुनर्विचारित शर्तों और नियमों पर एसओओ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत वे मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने, नामित शिविरों को संवेदनशील क्षेत्रों से दूर स्थानांतरित करने और राज्य में स्थायी शांति एवं स्थिरता लाने के लिए समाधान खोजने पर सहमत हुए।
लोक भवन के जरिये शाह को भेजे गए एक ज्ञापन में, मणिपुर के स्वदेशी पीपुल्स फोरम (आईपीएफएम) और फुटहिल्स नगा समन्वय समिति (एफएनसीसी) ने “राज्य में शांति और स्थिरता बहाल करने के उपाय के रूप में 2008 में किए गए एसओओ समझौते की स्थिति और कार्यान्वयन” के बारे में जानकारी मांगी। कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) के साथ हस्ताक्षरित समझौते को शांति और स्थिरता के हित में बढ़ाया गया था, जिसमें निगरानी और अनुपालन को सख्त करने के उद्देश्य से कुछ संशोधन किए गए थे। बयान में कहा गया है, “इस संदर्भ में, हम विनम्रतापूर्वक यह स्पष्टीकरण चाहते हैं कि क्या ये संशोधन पूरी तरह से लागू किए गए हैं।”
ज्ञापन में कहा गया है कि उपलब्ध सरकारी अभिलेखों के अनुसार, मणिपुर के पांच जिलों में स्थित विभिन्न एसओओ समूहों से संबंधित कुल 2,167 कैडर को निर्दिष्ट शिविरों में ठहराया गया है। ये शिविर चुराचांदपुर, तेंगनौपाल, कांगपोकपी, चन्देल और फेरजौल जिलों में स्थित हैं। इसमें कहा गया है, “हमें आशंका है कि एसओओ की शर्तों को लागू करने में निरंतर अस्पष्टता या कथित निष्क्रियता से वैधानिक प्राधिकार में जनता का विश्वास कमज़ोर हो सकता है… हम आपसे विनम्रतापूर्वक निवेदन करते हैं कि एसओओ के अंतर्निहित ढांचे और उसके प्रवर्तन की व्यापक, पारदर्शी और समयबद्ध समीक्षा पर विचार करें।” Manipur
Read Also: आज NDA संसदीय दल की बैठक… कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
मणिपुर में तीन मई, 2023 से जातीय हिंसा देखी जा रही है, जब पहाड़ी जिलों में बहुसंख्यक मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में एक आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला गया था। तब से हिंसा में कुकी और मेइती समुदायों के सदस्यों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मियों सहित लगभग 260 लोग मारे गए हैं, जबकि हजारों लोग बेघर हो गए हैं। राज्य में पिछले साल फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है। Manipur
