Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान को बंद किए जाने पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इसको बंद करना सरकार का मुद्दा नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों का मामला है। उन्होंने रविवार 8 फरवरी को राज्य के वित्त विभाग द्वारा हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति और राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति के प्रभावों पर ये बात कही।प्रस्तुति के बाद बोलते हुए सुक्खू ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर, जिसमें आगामी बजट भी शामिल है, दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। Himachal Pradesh:
राज्यों के राजस्व में अंतर को दूर करने के लिए केंद्र सरकार वित्त आयोग की सिफारिश पर संविधान के अनुच्छेद 275 के तहत पात्र राज्यों को राजस्व घाटा अनुदान देती है। उन्होंने कहा, “हम इस मुद्दे को उठाने के लिए बीजेपी सांसदों और विधायकों के साथ दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए तैयार हैं। मुझे लगता है कि एक बार आरडीजी का प्रावधान समाप्त हो जाने के बाद, जनता के अधिकारों को फिर से हासिल करना मुश्किल होगा।” Himachal Pradesh:
सुक्खु ने कहा, “हमने बीजेपी विधायकों को भी इस प्रस्तुति में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन दुर्भाग्य से वे नहीं आए।” उन्होंने कहा कि 17 राज्यों के अनुदान रद्द कर दिए गए हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित है क्योंकि बजट का 12.7 फीसदी हिस्सा अनुदानों से आता है, जो देश में दूसरा सबसे अधिक है। उन्होंने ये भी कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद कर संग्रह में वृद्धि घटकर लगभग आठ प्रतिशत रह गई है, जो जीएसटी लागू होने से पहले 13 से 14 प्रतिशत थी।
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कांग्रेस नेता ने कहा, “हिमाचल प्रदेश एक उत्पादक राज्य होने के नाते जीएसटी लागू होने से अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है क्योंकि ये उपभोक्ता-आधारित कर है और राज्य की जनसंख्या मात्र 75 लाख है।” उन्होंने आगे कहा कि जीएसटी व्यवस्था ने कर लगाने की क्षमता भी छीन ली है। उन्होंने कहा, “हमें राज्य के लोगों के लिए लड़ना होगा। केंद्र सरकार को कम से कम उन बिजली परियोजनाओं पर 50 प्रतिशत रॉयल्टी सुनिश्चित करनी चाहिए जिन्होंने अपना पूरा ऋण चुका दिया है और उन सभी बिजली परियोजनाओं को राज्य को वापस सौंप देना चाहिए जिन्होंने 40 वर्ष पूरे कर लिए हैं।” Himachal Pradesh:
