Britain: लंदन स्थित इंडिया हाउस में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर भोजपुरी कविता पाठ, संस्कृत के चिंतनशील श्लोक, हिमाचल प्रदेश के संगीत और असम के बिहू लोक नृत्य की धुनें प्रमुख आकर्षणों में शामिल थीं। संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त यह भाषाई उत्सव, प्रतिवर्ष 21 फरवरी को मनाया जाता है। इसे, समावेश को बढ़ावा देने और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुभाषी शिक्षा की भूमिका को उजागर करने के लिए आयोजित किया जाता है।
बता दें, शुक्रवार 20 फरवरी को भारतीय उच्चायोग का सम्मेलन अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, राजस्थान, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस समारोहों के साथ हुआ, जिसका आयोजन ब्रिटेन में भारत के सभी हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाले जीवंत प्रवासी समुदाय को प्रदर्शित करने के लिए किया गया था।ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी ने कहा, “भारत को जो चीज अविश्वसनीय बनाती है, उसका सबसे बड़ा पहलू राज्यों में विविधता का संस्थागतकरण है।” “जब हम इन सभी चीजों का जश्न मनाते हैं, जिनमें हमारा राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ भी शामिल है, तो हम भारत को उसके सबसे व्यापक, समावेशी और विस्तृत अर्थ में मना रहे होते हैं। भारत के हर हिस्से में, हम अपनी विविधता के हर पहलू का जश्न मनाते हैं। उन्होंने कहा, “भारत का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं है जिसमें हमारी परंपराएं, हमारी संस्कृतियां, हमारे धर्म, गांवों तक, उसका अभिन्न अंग न हों।”
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इस कार्यक्रम में वक्ताओं में भारतीय विद्या भवन ब्रिटेन के निदेशक एम. एन. नंदकुमार भी शामिल थे, जिन्होंने अपनी मातृभाषा कन्नड़ में अपने विचार साझा किए। युवा पीढ़ी के लिए अपनी जड़ों और भाषा से जुड़े रहने के महत्व को उजागर करने के लिए संस्कृत श्लोकों का पाठ भी किया। उन्होंने कहा, “इस दुनिया में कोई भी धन ज्ञान के बराबर नहीं है और भाषा उस ज्ञान का मार्ग है।” ब्रिटेन स्थित सामाजिक पहल गामाभाना की सह-संस्थापक सुप्रिया देशपांडे ने महाराष्ट्रीयन संस्कृति को संरक्षित करने और पश्चिम में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निःशुल्क मराठी भाषा की कक्षाएं और निःशुल्क मराठी पुस्तकालय चलाने के अपने कार्य से जुड़े अनुभव साझा किए। अपने-अपने राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली पारंपरिक पोशाकों में सजे-धजे सामुदायिक दिग्गज, पेशेवर और छात्र संगीत प्रस्तुतियों में शामिल हुए।
