Chhattisgarh: माओवादी विकास सहित 15 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

Chhattisgarh: 15 Naxalites, including Maoists, surrendered

Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में रविवार 1 मार्च को कुल 73 लाख रुपये के इनाम वाले 15 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें माओवदियों के संगठन में विशेष क्षेत्रीय समिति स्तर का सदस्य विकास भी शामिल है। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इस आत्मसमर्पण के साथ, ओडिशा की सीमा से लगे रायपुर-संबलपुर क्षेत्र में प्रतिबंधित माओवादी संगठन का सफाया हो चुका है। पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में नौ महिलाएं भी शामिल हैं।

ये नक्सली प्रतिबंधित संगठन के बालांगीर-बरगढ़-महासमुंद (बीबीएम) डिवीजन से संबंधित थे और छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर सक्रिय थे। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के अपर पुलिस महानिदेशक (नक्सल विरोधी अभियान) विवेकानंद सिन्हा, पुलिस महानिरीक्षक (उत्तरी रेंज) संबलपुर (ओडिशा) हिमांशु लाल, आईजीपी (ग्रामीण जोन, रायपुर) अमरेश मिश्रा और अन्य की उपस्थिति में नक्सलियों ने महासमुंद जिला मुख्यालय में आत्मसमर्पण किया। अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) सिन्हा ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इन 15 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के साथ, माओवादियों की ओडिशा राज्य समिति का पश्चिमी उपक्षेत्र पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया है। उन्होंने बताया कि प्रतिबंधित संगठन की ओडिशा राज्य समिति और बीबीएम डिवीजन का गठन 2010 में किया गया था।

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सिन्हा ने कहा, ‘‘एक साल पहले तक इस उपक्षेत्र में नक्सली संगठन के दो डिवीजन और सात क्षेत्रीय समितियां सक्रिय थीं। अब छत्तीसगढ़ का रायपुर पुलिस रेंज और ओडिशा का संबलपुर रेंज नक्सली प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।’’ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आकाशवाणी प्रसारण, बैनर, पोस्टर और पर्चे सहित विभिन्न संचार माध्यमों के जरिये महासमुंद के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय बीबीएम संभागीय समिति के सदस्यों से लगातार अपील की गई थी। उन्होंने बताया कि नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का व्यापक प्रचार भी किया गया था, जिसमें प्रतिबंधित संगठन में ओहदे के आधार पर वित्तीय प्रोत्साहन, हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने पर अतिरिक्त पुरस्कार, स्वास्थ्य देखभाल लाभ, आवास और रोजगार सहायता प्रदान की जाती है।  Chhattisgarh

पुलिस ने बताया कि खोखली माओवादी विचारधारा, जंगलों में जीवन की कठिनाइयों और परिवारों से लंबे समय तक बिछड़ने से निराश होकर इन नक्सलियों ने हिंसा छोड़ने का फैसला किया। उसने बताया कि ये नक्सली उन पूर्व माओवादियों से भी प्रभावित थे, जिन्होंने पहले आत्मसमर्पण कर दिया था और अब पुनर्वास योजना के तहत खुशहाल जीवन जी रहे हैं। सिन्हा ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में विकास (57) शामिल है। उसे सुदर्शन, जांगू, बबन्ना, राजन्ना और मुप्पिडी सांबैया के नाम से भी जाना जाता है। वह मूल रूप से तेलंगाना के वारंगल जिले का निवासी है और 1985 से प्रतिबंधित संगठन में सक्रिय था।

अधिकारी ने बताया कि विकास प्रतिबंधित संगठन में तेलंगाना राज्य क्षेत्रीय समिति का सदस्य था। उसने संगठन में छत्तीसगढ़ में दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति (डीकेएसजेडसी) के दक्षिणी उपक्षेत्र के सचिव पद पर 10 वर्ष तक काम किया था और दो वर्षों तक गढ़चिरोली मंडल (महाराष्ट्र में) का प्रभारी रहा था। एडीजीपी ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘विकास उन लोगों में शामिल था, जिन्होंने प्रतिबंधित संगठन का ओडिशा में आधार बनाया और ओडिशा राज्य समिति की स्थापना में मदद की। उस पर 25 लाख रुपये का इनाम था।’’ उन्होंने बताया, ‘‘जोनल समिति के दो अन्य सदस्यों, मंगेश और बाबू पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था। क्षेत्र समिति के पांच सदस्यों पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम था, जबकि संगठन के सात सदस्यों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था।’’

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अधिकारी ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले छह नक्सलियों में नीला, सोनू, रीना, दिनेश, दीपना और रानिला शामिल हैं, जो पहले माओवादी संगठन की केंद्रीय समिति के सदस्य जयराम उर्फ चलपति के अंगरक्षक के रूप में काम कर चुके हैं। चलपति पिछले साल जनवरी में छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में एक मुठभेड़ में मारा गया था। सिन्हा ने बताया कि चलपति के मारे जाने के बाद इन छह सदस्यों को विकास के अधीन बीबीएम डिविजन में स्थानांतरित कर दिया गया था। अधिकारी ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने 14 हथियार सौंपे, जिनमें तीन एके-47 राइफल, दो एसएलआर राइफल, दो आईएनएसए राइफल, चार प्वॉइंट 303 राइफल और तीन 12-बोर बंदूक शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ के गृह विभाग की भी जिम्मेदारी संभाल रहे शर्मा ने इस घटनाक्रम को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने रायपुर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘आज का पुनर्वास बहुत महत्वपूर्ण है। बालांगीर-बरगढ़-महासमुंद डिवीजन के पंद्रह नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है।इस डिवीजन में केवल 15 सदस्य बचे थे, और उन सभी ने अब हथियार डाल दिए हैं।’’ अधिकारियों ने कहा कि गत दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में 532 माओवादियों को मार गिराया गया है; 2,700 से अधिक ने आत्मसमर्पण किया है और लगभग 2,000 को गिरफ्तार किया गया है। केंद्र सरकार ने इस साल 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया है।

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