War: ईरान के खिलाफ युद्ध में मदद के लिए अमेरिका मध्य पूर्व में 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के करीब 3,000 सैनिकों को तैनात करने के बार में सोच रहा है। रक्षा विभाग के दो अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप को अतिरिक्त सैन्य विकल्प देने के लिए उठाया गया है, जबकि वह ईरान के साथ एक नई कूटनीतिक पहल पर भी विचार कर रहे हैं। ये सैनिक डिविजन की इमीडिएट रिस्पॉन्स फोर्स का हिस्सा हैं, जिसमें करीब 3,000 जवान होते हैं और जो 18 घंटे के भीतर दुनिया के किसी भी हिस्से में तैनात हो सकते है।War
Read Also-उत्तर पूर्वी दिल्ली के पार्क में नाबालिग लड़के का मिला शव, जांच में जुटी पुलिस
अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि आने वाले दिनों में इस ब्रिगेड के और सैनिक भी भेजे जा सकते हैं, पहले से ही करीब 4,500 मरीन सैनिक इस क्षेत्र के लिए रवाना हो चुके हैं। ऐसे में इस नई तैनाती के साथ युद्ध शुरू होने के बाद अब तक भेजे गए अतिरिक्त जमीनी सैनिकों की संख्या करीब 7,000 हो गई है । इसे इस संघर्ष में एक नई बढ़ोतरी के तौर पर देखा जा रहा है।War
Read Also-कांग्रेस को अकबर रोड कार्यालय खाली करने का नोटिस, पार्टी ने बताया भेदभावपूर्ण
पेंटागन के एपिक फ्यूरी ऑपरेशन के तहत करीब 50,000 सैनिक तैनात हैं, जो मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से जुड़े हैं। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इन पैराट्रूपर्स को मध्य पूर्व में किस स्थान पर तैनात किया जाएगा, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यह जगह ईरान की पहुंच के भीतर होगी। उदाहरण के तौर पर, इन सैनिकों का इस्तेमाल खार्ग द्वीप पर कब्जा करने के लिए किया जा सकता है, जो उत्तरी फारस की खाड़ी में ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है। इसी महीने की शुरुआत में अमेरिकी युद्धक विमानों ने यहां 90 से अधिक सैन्य ठिकानों पर बमबारी की थी।War
