Delhi: दिल्ली कांग्रेस दफ्तर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने संसद सत्र बढ़ाये जाने को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए है।जयराम रमेश ने इसे आदर्श आचार संहिता MCC का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि जब देश के दो प्रमुख राज्यों में चुनाव अपने चरम पर होंगे, तब संसद सत्र बुलाना लोकतंत्र की मर्यादा के खिलाफ है।जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि यह विशेष सत्र महिला आरक्षण विधेयक पर चुनाव में लाभ लेने की कोशिश है। जबकि कांग्रेस इसे तुरंत लागू करने की मांग करती रही है।Delhi:
Read Also- TMC: पश्चिम बंगाल चुनाव में गरमाई सियासत, CM ममता ने अमित शाह की 15 दिवसीय बंगाल योजना का उड़ाया मजाक…
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष की ‘सर्वदलीय बैठक’ की मांग को दरकिनार कर सत्र बुलाने का फैसला किया है। जयराम रमेश ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मल्लिकार्जुन खरगे को महिला आरक्षण और संविधान संशोधन पर चर्चा के लिए पत्र लिखा था। जवाब में खरगे ने स्पष्ट किया कि चुनाव के चलते विपक्षी दल व्यस्त हैं, इसलिए 29 अप्रैल के बाद ही बैठक बुलाई जाए। लेकिन सरकार ने विपक्ष की मांग को अनसुना कर एकतरफा फैसला लिया है।Delhi:
Read Also-Bihar: बिहार में जहरीली शराब का कहर, मोतिहारी में 4 ने दम तोड़ा
जयराम रमेश ने कहा कि “यह केवल चुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है। अगर सरकार 15 दिन और रुक जाती, तो आसमान नहीं गिर पड़ता। बीजेपी ‘डबल इंजन’ की तरह अब ‘डबल फायदा’ उठाने की फिराक में है।”कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने परिसीमन (Delimitation) को लेकर भी सरकार को आगाह किया है। पार्टी का कहना है कि अगर सरकार ने बिना सोचे-समझे सीटें बढ़ाईं, तो कई राज्यों को भारी नुकसान होगा।जयराम रमेश ने चेतावनी दी कि आर्टिकल 81 और 82 में संशोधन की जल्दबाजी तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।Delhi:
जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले इन राज्यों की संसदीय शक्ति कम हो जाएगी।फिलहाल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जल्द ही विपक्षी दलों के साथ बैठक कर साझा रणनीति तैयार करेंगे। साफ़ है कि 16 अप्रैल से शुरू होने वाला यह सत्र हंगामेदार रहने वाला है।
