हरियाणा में इस बार सरकार ने रबी खरीद सीजन 2026-27 की फसल खरीद प्रणाली में नए व महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। जिसके तहत एंट्री गेट पास जारी करते समय वाहन नंबर और वाहन की फोटो दर्ज करना की व्यवस्था की गई है। स्वयं किसान या उसके द्वारा तीन नामित व्यक्तियों में से किसी एक व्यक्ति का बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर पाएंगे।
अंगूठे के मिलान का सत्यापन न होने की स्थिति में आंखों की पुतली से प्रमाणीकरण भी विकल्प तंत्र के रूप में उपलब्ध कराया गया है। मंडी की आवश्यकता के अनुसार मार्केट कमेटी को बायोमेट्रिक उपकरण खरीदने की अनुमति प्रदान की गई है। फसल खरीद के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितताओं की रोकथाम के लिए सभी मंडियों और गोदामों को जिओ फेंसिंग के दायरे में लाया गया है। इससे अनधिकृत उपयोग पर रोक लगेगी और लोकेशन आधारित निगरानी भी मजबूत होगी। मंडी से स्टॉक बाहर ले जाने से पहले खरीद संस्था के कर्मचारी के अतिरिक्त संबंधित ट्रांसपोर्टर और सचिव मार्केट कमेटी को अधिकृत किया गया है। गेहूं के उठान और परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की आवाजाही की निगरानी जीपीएस के माध्यम से सुनिश्चित की जा रही है।
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पारदर्शिता और तकनीक से सशक्त हुई हरियाणा की मंडी व्यवस्था
हरियाणा की मंडियों में इस वर्ष रबी खरीद सीजन 2026-27 के दौरान खाद्यान्न खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सुदृढ़ एवं जवाबदेह बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा अनेक महत्वपूर्ण सुधार लागू किए गए हैं। भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों की उपज की खरीद को सुनिश्चित करने के साथ-साथ अब पूरी प्रक्रिया को तकनीक के माध्यम से और भी विश्वसनीय बनाया जा रहा है।
खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में इस बार कई नए प्रावधान लागू किए गए हैं, जिनमें किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन, वाहनों का पंजीकरण, मंडियों और गोदामों की जियो-फेंसिंग, तथा CCTV कैमरों की स्थापना शामिल है। इन उपायों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक किसानों को ही उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
वाहन पंजीकरण और फोटो अनिवार्यता से बढ़ी निगरानी
अब मंडियों में प्रवेश के समय हर वाहन का नंबर और फोटो दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। इससे फसल के वास्तविक आगमन की पुष्टि होती है और फर्जी या डुप्लीकेट गेट पास जारी होने पर रोक लगती है। विशेष परिस्थितियों में, जहां वाहन नंबर उपलब्ध नहीं होता, वहां फोटो के आधार पर भी अनुमति दी गई है, जिससे किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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बायोमेट्रिक सत्यापन से सुनिश्चित हुई असली किसान की पहचान
खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए किसानों या उनके द्वारा नामित तीन प्रतिनिधियों में से किसी एक का बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। अंगूठे के मिलान में समस्या आने पर आंखों की पुतली से प्रमाणीकरण की सुविधा भी उपलब्ध है। राज्यभर में 1,281 बायोमेट्रिक डिवाइस और 407 आईरिस स्कैन उपकरण स्थापित किए गए हैं, जिससे सत्यापन प्रक्रिया तेज और सुगम बनी रहे।
जियो-फेंसिंग से मजबूत हुई लोकेशन आधारित निगरानी
मंडियों और गोदामों को जियो-फेंसिंग के दायरे में लाया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि गेट पास केवल निर्धारित क्षेत्र के भीतर ही जारी हो। इससे अनधिकृत गतिविधियों पर रोक लगेगी और खरीद प्रक्रिया की विश्वसनीयता और बढ़ेगी।
एग्जिट गेट पास में बहु-स्तरीय सत्यापन
मंडी से स्टॉक बाहर ले जाने से पहले अब खरीद संस्था, ट्रांसपोर्टर और मार्केट कमेटी सचिव की संयुक्त स्वीकृति आवश्यक कर दी गई है। यह कदम पिछले वर्षों में सामने आई अनियमितताओं को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
CCTV और GPS निगरानी से हर गतिविधि पर नजर
मंडियों के सभी प्रवेश द्वारों पर CCTV कैमरे लगाए गए हैं, वहीं फसल के परिवहन में लगे वाहनों की GPS के माध्यम से निगरानी की जा रही है। इससे पूरे सिस्टम पर रियल-टाइम नजर रखी जा सकेगी और किसी भी अनियमितता का तुरंत पता लगाया जा सकेगा।
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तकनीकी सहायता से किसानों को त्वरित समाधान
राज्य सरकार द्वारा 114 तकनीकी कर्मियों और फील्ड टीमों को तैनात किया गया है, जो मंडियों में मौके पर ही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इन सभी सुधारों का उद्देश्य किसानों को कठिनाई में डालना नहीं, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद खरीद व्यवस्था प्रदान करना है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल वास्तविक किसानों को ही न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिले और सार्वजनिक धन का सही उपयोग हो। हरियाणा सरकार के ये प्रयास राज्य के किसानों को सशक्त बनाने और कृषि व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
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