कमजोर मानसून के कारण मौजूदा सत्र में अब तक धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा 16 प्रतिशत घटकर 531.25 लाख हेक्टेयर रह गया है। कृषि मंत्रालय ने यह जानकारी दी है।
खरीफ (गर्मी) की फसलों की बुवाई आम तौर पर जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ होती है। हालांकि, इस साल अल-नीनो के असर से कमजोर मानसून के कारण बुवाई में देरी हुई है। मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 10 जुलाई तक कुल खरीफ फसलों की बुवाई 531.25 लाख हेक्टेयर में की गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 632.69 लाख हेक्टेयर था।
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धान की बुवाई का रकबा 8.63 प्रतिशत घटकर 114.69 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि एक साल पहले यह 125.53 लाख हेक्टेयर था। वहीं दलहनों के तहत रकबा पहले के 73.85 लाख हेक्टेयर से 23.31 प्रतिशत घटकर 56.63 लाख हेक्टेयर रह गया। दलहनों में, अरहर की बुवाई का रकबा एक साल पहले के 28.03 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 19.54 लाख हेक्टेयर, उड़द का 9.34 लाख हेक्टेयर (13.29 लाख हेक्टेयर) और मूंग का 21.52 लाख हेक्टेयर (24.08 लाख हेक्टेयर) रह गया।
मोटे अनाज के तहत रकबा पहले के 127.30 लाख हेक्टेयर से 22.47 प्रतिशत घटकर 98.69 लाख हेक्टेयर रह गया। तिलहन की बुवाई का रकबा पहले के 149.18 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 21 प्रतिशत घटकर 117.83 लाख हेक्टेयर रह गया। वहीं तिलहन में, सोयाबीन की बुवाई का रकबा पहले के 107.72 लाख हेक्टेयर से 16 प्रतिशत घटकर 90.51 लाख हेक्टेयर रह गया। इसके इतर गन्ने की खेती का रकबा 56.72 लाख हेक्टेयर के मुकाबले थोड़ा बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि जूट या मेस्टा का रकबा पहले के 6.16 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.28 लाख हेक्टेयर हो गया। नकदी फसलों में, कपास की बुवाई में गिरावट आई। इस खरीफ सत्र में अब तक इसका रकबा 15.33 प्रतिशत घटकर 79.54 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 93.95 लाख हेक्टेयर था।
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