Business & Economy: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी

Business & Economy:

Business & Economy: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शुक्रवार को तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह पिछले चार वर्षों में पेट्रोल-डीजल के दाम में पहली वृद्धि है। कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के कारण तेल विपणन कंपनियों के घाटे बढ़ने के बीच यह वृद्धि की गई है।गौरतलब है कि चार राज्यों-असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव समाप्त होने के 16 दिन बाद ये बढ़ोतरी हुई है। मतदान अवधि के दौरान ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था जबकि पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज वृद्धि हुई थी। उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है। डीजल अब 87.67 रुपये के मुकाबले 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया है। कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर थीं।Business & Economy

Read Also-TRUMP: ‘शी जिनपिंग से ‘100 प्रतिशत’ सहमत हूं कि अमेरिका का पतन हो रहा था बाइडेन के शासन में’

हालांकि मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल दोनों में दो रुपये प्रति लीटर की एकमुश्त कटौती की गई थी। आखिरी बार दरों में बढ़ोतरी अप्रैल 2022 में हुई थी। मुंबई में पेट्रोल अब 106.68 रुपये प्रति लीटर और डीजल 93.14 रुपये प्रति लीटर हो गया है। कोलकाता में पेट्रोल 108.74 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.13 रुपये प्रति लीटर है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 103.67 रुपये और डीजल 95.25 रुपये प्रति लीटर हो गया है।Business & Economy

दरें राज्यों में मूल्य वर्धित कर के अंतर के कारण अलग-अलग होती हैं। ईंधन कीमतें आधिकारिक रूप से नियंत्रण मुक्त हैं, लेकिन संशोधन अक्सर राजनीतिक कारणों से प्रभावित होते हैं। वैश्विक ऊर्जा कीमतें 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका–इजराइल हमले के बाद और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के कारण तेजी से बढ़ीं। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य अवरूद्ध हो गया जिससे दुनिया के तेल और गैस का पांचवां हिस्सा गुजरता है।Business & Economy

पेट्रोल और डीजल बनाने का कच्चा माल यानी कच्चा तेल संघर्ष के दौरान एक समय 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया था जबकि संघर्ष से पहले ये 70–72 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में था। हाल के समय में कीमतें कुछ नरम हुई हैं, लेकिन फिर भी 104–110 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इससे सरकारी तेल विपणन कंपनियों को भारी घाटा हुआ लेकिन चुनाव के मद्देनजर खुदरा दरें स्थिर रखी गईं।Business & Economy

तेल कंपनियां चुनाव से पहले पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी पर 674 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठा रही थीं। इस सप्ताह की शुरुआत में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि तीन ईंधन खुदरा कंपनियां प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का घाटा उठा रही हैं।Business & Economy

एक तिमाही का कुल घाटा पूरे वर्ष के लाभ को समाप्त करने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कुल घाटा लगभग एक लाख करोड़ रुपये बताया था। बढ़ती वैश्विक कीमतों से उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। निजी ईंधन खुदरा कंपनियों ने पहले ही कीमतें बढ़ा दी थीं।Business & Economy

Read Also-BJP: दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मिले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

नायरा एनर्जी ने मार्च में पेट्रोल पांच रुपये और डीजल तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ाया था, जबकि शेल ने एक अप्रैल से पेट्रोल 7.41 रुपये और डीजल 25 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया था। बेंगलुरू में शेल पेट्रोल 119.85 रुपये प्रति लीटर और डीजल 123.52 रुपये प्रति लीटर पर बेचता है। घरेलू रसोई गैस एलपीजी की कीमतें मार्च में 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाई गई थीं लेकिन वे अब भी वास्तविक लागत से काफी कम हैं।

Top Hindi NewsLatest News Updates, Delhi Updates, Haryana News, click on Delhi FacebookDelhi twitter and Also Haryana FacebookHaryana Twitter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *