POLITICS: संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ने लगी है। सोनिया गांधी की अखबार में पार्लियामेंट स्ट्रेटजी ग्रुप की बैठक में संसद सत्र की रणनीति पर मंथन हुआ है वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने परिसीमन विधेयक को लेकर पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।POLITICS
आज नई दिल्ली स्थित एआईसीसी कार्यालय में कांग्रेस पार्लियामेंट्री स्ट्रेटेजी ग्रुप की करीब डेढ़ घंटे तक एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख श्रीमती सोनिया गांधी ने की जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत तमाम वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार को तीखे तेवरों के साथ घेरा।POLITICS
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने साफ कर दिया है कि आगामी 19 दिनों के मानसून सत्र में विपक्ष पूरी एकजुटता के साथ सरकार की जनविरोधी नीतियों और विधेयकों का पुरजोर विरोध करेगा। जयराम रमेश ने सत्र से पहले बुलाई जाने वाली सर्वदलीय बैठक को महज एक ‘औपचारिकता’ करार दिया। जयराम रमेश ने कहा-“यह सर्वदलीय बैठक एक औपचारिकता है, बेमतलब की औपचारिकता है, जहां 35 नेता बोलते हैं, सरकार की ओर से चार नेता सुनते हैं और दो लोग जिनको करना है… दो नेता वो करते हैं।”प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयराम रमेश ने उन संभावित विधेयकों की सूची सामने रखी, जिन पर कांग्रेस और पूरा विपक्ष सरकार के खिलाफ खड़ा होने जा रहा है।POLITICS
परिसीमन विधेयक (डीलिमिटेशन बिल): कांग्रेस का आरोप है कि सरकार चालाकी से महिला आरक्षण के नाम पर खतरनाक परिसीमन विधेयक लाना चाहती है, जिसका शत-प्रतिशत विरोध किया जाएगा। संविधान संशोधन विधेयक (बर्खास्तगी संबंधी): विपक्ष ने पूर्व में जिस जेपीसी (JPC) का बहिष्कार किया था, इस विधेयक का भी भरपूर विरोध होगा। वन नेशन वन इलेक्शन: जयराम रमेश ने इसे पूरी तरह से ‘गैर-संवैधानिक’ और ‘गैर-लोकतांत्रिक’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस विचार के ही खिलाफ है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 में संशोधन: कांग्रेस इस कानून में किसी भी प्रकार के संशोधन के पक्ष में नहीं है। विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक और एफसीआरए (FCRA) विधेयक: इन दोनों का भी संसद में विरोध किया जाएगा।POLITICS
सरकार द्वारा लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत जुटाने के दावों और चल रही खबरों पर तंज कसते हुए जयराम रमेश ने इसे ‘मनोवैज्ञानिक खेल’ बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के आंकड़े मजबूत हैं और सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है। जयराम रमेश ने कहा”अगर इन्हें तोड़-फोड़ कर दो-तिहाई बहुमत मिल भी जाता है, तो यह एक कलंकित बहुमत होगा। यह जनादेश और संविधान का अपमान होगा। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत अभी बहुत दूर है।”POLITICS
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राकांपा (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले ने भी बीजेपी को समर्थन देने की अफवाहों का पूरी तरह से खंडन कर दिया है। कांग्रेस नेतृत्व डीएमके, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत सभी सहयोगी दलों के साथ लगातार संपर्क में है। विधेयकों के अलावा कांग्रेस ने उन मुद्दों की भी रूपरेखा तैयार की है, जिन पर संसद से सड़क तक हंगामा होना तय है।POLITICS
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इस बीच परिसीमन विवाद पर विपक्ष आक्रामक है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है। खरगे ने परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है और कहा है कि-‘संविधान संशोधन बिल गिरने के बाद भी सरकार ने सबक नही लिया है। पीएम मोदी को पत्र लिख खरगे ने याद दिलाया है कि 131वें संशोधन बिल को विपक्ष के किस तरहा से फेल किया था। साफ़ है कि आगामी मानसून सत्र बेहद हंगामेदार होने वाला है।
एक तरफ जहां सरकार कई महत्वपूर्ण बिल पास कराने की तैयारी में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ एकजुट विपक्ष ने सरकार की घेराबंदी का पूरा चक्रव्यूह तैयार कर लिया है। अब देखना यह होगा कि 19 दिनों के इस सत्र में देश से जुड़े इन अहम मुद्दों पर कितनी सार्थक चर्चा हो पाती है।POLITICS
