नीति आयोग के निवेश अनुकूल सूचकांक में शीर्ष पर गुजरात, लक्षद्वीप का प्रदर्शन सबसे खराब

नीति आयोग के निवेश अनुकूल सूचकांक में गुजरात पहले स्थान पर है। वहीं महाराष्ट्र और तमिलनाडु क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। वहीं, केंद्र शासित प्रदेशों में लक्षद्वीप का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जिसके बाद लद्दाख और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह रहे।

इस सूचकांक में बुनियादी ढांचा, कारोबारी माहौल, संसाधन, सरकारी नीतियां, नियामकीय सुगमता, संस्थागत व्यवस्था, वित्तीय स्थिति और पर्यावरण संबंधी मजबूती के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन किया गया है।

नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अशोक कुमार लाहिड़ी द्वारा जारी रिपोर्ट में राज्यों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- बड़े राज्य, पहाड़ी एवं पूर्वोत्तर राज्य और शहर वाले राज्य (दिल्ली आदि) और केंद्र शासित प्रदेश। बड़े राज्यों की श्रेणी में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। वहीं, ओडिशा, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश क्रमश: चौथे, पांचवें और छठे स्थान पर रहे। गुजरात 56.6 अंक के साथ शीर्ष पर रहा।

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रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का बेहतर प्रदर्शन बुनियादी ढांचे, कारोबारी माहौल, वित्तीय स्थिति, नियामकीय सुगमता और सरकारी नीतियों के क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन के कारण रहा। हालांकि, संसाधन, संस्थागत व्यवस्था और पर्यावरण अनुकूल उपायों के क्षेत्रों में सुधार की गुंजाइश है। रिपोर्ट में कहा गया कि बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में गुजरात की बेहतर रैंकिंग उसके कुशल बंदरगाह संचालन और बिजली क्षेत्र के कारण है। राज्य में प्रतिस्पर्धी औद्योगिक और वाणिज्यिक बिजली दरों और बिजली पारेषण और वितरण (टीएंडडी) में कम नुकसान ने भी योगदान दिया है।

महाराष्ट्र 53.7 अंक के साथ बड़े राज्यों की श्रेणी और पूरे देश के स्तर पर दूसरे स्थान पर रहा। नीति आयोग ने कहा कि राज्य को कारोबारी माहौल के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन का लाभ मिला है। इसके अलावा संसाधन और वित्तीय स्थिति के क्षेत्रों में भी राज्य का प्रदर्शन मजबूत रहा, जबकि बुनियादी ढांचे और नियामकीय सुगमता में सुधार की संभावना है। वहीं तमिलनाडु 53.3 अंक के साथ देशभर और बड़े राज्यों की श्रेणी में तीसरे स्थान पर रहा। राज्य का प्रदर्शन बुनियादी ढांचे और कारोबारी माहौल के क्षेत्र में मजबूत रहा, जबकि वित्तीय स्थिति में सुधार की जरूरत बताई गई है। पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में उत्तराखंड, असम और हिमाचल प्रदेश शीर्ष तीन स्थानों पर रहे।

रिपोर्ट जारी करते हुए लाहिड़ी ने कहा कि भारत में निवेश दर करीब 25 प्रतिशत है, जो उस समय चीन की निवेश दर से कम है। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ सालों में भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था रहा है। आर्थिक वृद्धि में निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारत को अधिक निवेश की जरूरत है, क्योंकि इससे मांग को भी बढ़ावा मिलता है।”

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लाहिड़ी ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल उच्च आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ये भी पक्का करना होगा कि वृद्धि व्यापक, मजबूत और उत्पादकता आधारित हो। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऐसे निवेश में तेजी लाने की जरूरत है, जो उत्पादन क्षमता बढ़ाए, विनिर्माण को मजबूत करे, गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा करे और नवाचार को बढ़ावा दे।

निवेश अनुकूलता सूचकांक में सभी 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इसमें ये आकलन किया गया है कि कोई राज्य निवेशकों के लिए कितना आकर्षक है और वहां निवेशकों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

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