Delhi: किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90% केन्द्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा और शेष 10% राशि का वित्तीय भार 06 राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा।
Delhi: नई दिल्ली में आज एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। लंबे समय से अटकी किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना पर छह राज्यों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के भजनलाल शर्मा, दिल्ली की रेखा गुप्ता और हरियाणा के नायब सिंह सैनी ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए है।Delhi
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यह परियोजना यमुना की सहायक नदी टौंस पर प्रस्तावित है। बांध उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल के सिरमौर जिले की सीमा पर बनेगा। इसकी ऊंचाई करीब 236 मीटर होगी। अनुमानित लागत लगभग 15 हजार करोड़ रुपये है। परियोजना से करीब 422 मेगावाट बिजली पैदा होगी। साथ ही लगभग 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और सालाना 517 मिलियन क्यूबिक मीटर पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे यमुना में साफ पानी का बहाव बढ़ेगा।Delhi
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जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार उठाएगी। बाकी 10 प्रतिशत छह राज्यों के बीच बंटेगा। हिमाचल के बिजली हिस्से की लागत दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा वहन करेंगे। बदले में हिमाचल का पानी इन राज्यों को मिलेगा। हिमाचल को बिना निवेश के बिजली और सालाना करीब 600 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है।
किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90% केन्द्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा और शेष 10% राशि का वित्तीय भार 06 राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा। अब यह परियोजना केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास मंजूरी के लिए जाएगी। यह समझौता यमुना के पुनर्जीवन और ऊपरी यमुना बेसिन में जल सहयोग की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।Delhi
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