Delhi की हवा ही नहीं IITM पुणे के शोधकर्ताओं ने 2018 से 2024 के बीच दिल्ली समेत अहमदाबाद और पुणे में गैसीय पारे की निगरानी की, जिसमें दिल्ली में इसका औसत स्तर सबसे ज्यादा दर्ज हुआ।
Health News Desk : दिल्ली की वायु गुणवत्ता को लेकर भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे के शोधकर्ताओं की स्टडी में एक अहम जानकारी सामने आई है। 2018 से 2024 के बीच किए गए अध्ययन में दिल्ली, अहमदाबाद और पुणे की हवा में गैसीय एलिमेंटल मरकरी यानी पारे के स्तर की निगरानी की गई। रिसर्च के मुताबिक दिल्ली में इसका औसत स्तर 6.9 नैनोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ। वहीं अहमदाबाद में यह 2.1 और पुणे में 1.5 नैनोग्राम प्रति घन मीटर रहा। यानी अध्ययन में शामिल तीनों शहरों में दिल्ली का स्तर सबसे अधिक था।
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स्टडी में पारे के स्रोतों को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि तीनों शहरों में पारे की मौजूदगी में मानव गतिविधियों का बड़ा योगदान है। जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल, औद्योगिक गतिविधियां और वाहनों से होने वाला उत्सर्जन इसके प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं। कोयले को जलाने से भी वातावरण में पारा उत्सर्जित हो सकता है। दिल्ली में रात के समय पारे का स्तर अपेक्षाकृत ज्यादा पाया गया, जिसे शोधकर्ताओं ने स्थिर वातावरण और कम ऊंचाई वाली वायुमंडलीय सीमा परत जैसी परिस्थितियों से जोड़ा है। हालांकि, इसे सिर्फ वाहनों या कंस्ट्रक्शन से निकलने वाले PM2.5 का नतीजा बताना सही नहीं होगा, क्योंकि इस अध्ययन में पारे को अलग प्रदूषक के रूप में मापा गया है।
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पारा एक विषैला प्रदूषक है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। वैज्ञानिक साहित्य के मुताबिक पारे का संपर्क खास तौर पर नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है और इसके स्वास्थ्य प्रभाव पारे के प्रकार, संपर्क की मात्रा और अवधि पर निर्भर करते हैं। हालांकि, मौजूदा स्टडी के आधार पर यह दावा करना सही नहीं होगा कि दिल्ली की हवा में मौजूद पारा सीधे लोगों के दिल या दिमाग पर हमला कर रहा है या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा रहा है। रिसर्च मुख्य रूप से वातावरण में गैसीय पारे के स्तर, उसके स्रोतों और शहरों के बीच अंतर का अध्ययन करती है। NOTE-दिल्ली में लंबे समय तक PM2.5 के संपर्क के कारण औसत जीवन प्रत्याशा करीब 8–12 साल तक कम होने का अनुमान अलग-अलग अध्ययनों में आया है।
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