BSP Politics: आकाश आनंद या ईशान आनंद? मायावती के बाद बसपा में नंबर-2 कौन, 13 दिन में बदली पूरी तस्वीर

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BSP Politics: बसपा में पिछले एक महीने में नंबर-2 की तस्वीर तेजी से बदली है. पहले आकाश आनंद को हटाया गया, फिर ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया और अब मायावती ने आकाश को दोबारा इसी पद पर लौटा दिया है. ऐसे में सवाल है कि आखिर मायावती के बाद बसपा में सबसे भरोसेमंद चेहरा कौन है?

News Desk : बहुजन समाज पार्टी में मायावती के बाद नेतृत्व को लेकर पिछले कुछ हफ्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. 3 सितंबर 2026 को मायावती ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया था और 10 सितंबर को उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी निष्कासित कर दिया गया. इसके बाद मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को आगे बढ़ाया. 23 सितंबर को ईशान आनंद को बसपा का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया. उस समय ऐसा लगा कि पार्टी में मायावती के बाद नंबर-2 की भूमिका अब ईशान को मिल गई है.BSP

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लेकिन यह व्यवस्था ज्यादा समय तक नहीं चली. आकाश आनंद ने मायावती को सार्वजनिक रूप से पत्र लिखकर अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी और बसपा को अपना परिवार बताया. उन्होंने मायावती के फैसलों का समर्थन किया और अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ से जुड़े विवाद पर भी पार्टी प्रमुख के फैसले को सही बताया. इसके बाद 5 अक्टूबर को मायावती ने आकाश आनंद को दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया और उन्हें फिर से राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंप दी. मायावती के मुताबिक आकाश के काम करने के तरीके में बदलाव आया और पार्टी नेताओं से विचार-विमर्श के बाद उन्हें फिर जिम्मेदारी देने का फैसला किया गया.BSP

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अब 6 अक्टूबर की स्थिति में औपचारिक तौर पर बसपा में मायावती के बाद सबसे प्रमुख संगठनात्मक भूमिका आकाश आनंद के पास है, क्योंकि वह राष्ट्रीय संयोजक के पद पर वापस आ चुके हैं. वहीं ईशान आनंद को लेकर आकाश की वापसी के बाद उनकी नई भूमिका पर कोई ऐसी स्पष्ट सार्वजनिक घोषणा सामने नहीं आई है, जिससे उन्हें मौजूदा समय में पार्टी का नंबर-2 कहा जा सके. हालांकि पिछले कुछ हफ्तों में ईशान को मिली जिम्मेदारियां बताती हैं कि मायावती उन्हें भी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए तैयार कर रही थीं. इसलिए फिलहाल तस्वीर यह है कि पद के लिहाज से आकाश आनंद आगे हैं, जबकि ईशान आनंद की भविष्य की भूमिका पर अभी नजर रहेगी. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मायावती का भरोसा किस पर लंबे समय तक कायम रहता है, यह बसपा की आगे की राजनीति के लिए अहम सवाल होगा.BSP

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