CEC पद की कानूनी सुरक्षा सिर्फ आधिकारिक चुनावी कामों तक सीमित, 2006 के कथित मामले को लेकर केरल सरकार की जांच के बीच बड़ा सवाल
News Desk : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ केरल सरकार की ओर से जांच के फैसले के बाद CEC की कानूनी इम्युनिटी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामला वर्ष 2006 का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के IAS अधिकारी के तौर पर लोक निर्माण विभाग यानी PWD के सचिव थे। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के मुताबिक, उस समय विभाग में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप सामने आए थे। मामले में मलेशियाई सिविल इंजीनियर लीसी बीन की आत्महत्या का मामला भी जुड़ा बताया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या 20 साल पुराने कथित मामले में मौजूदा CEC को पद के कारण कानूनी सुरक्षा मिल सकती है। उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, CEC को मिलने वाली सुरक्षा उनके आधिकारिक चुनावी काम से जुड़ी है।CEC
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मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से जुड़े 2023 के कानून की धारा 16 में कहा गया है कि किसी मौजूदा या पूर्व CEC या चुनाव आयुक्त के खिलाफ उस काम को लेकर सिविल या आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती, जो उनके आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन में किया गया हो। यह सुरक्षा पद छोड़ने के बाद भी बनी रहती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि CEC के हर काम को कानूनी इम्युनिटी हासिल है। धारा 16 की सुरक्षा आधिकारिक कर्तव्य से जुड़े काम तक सीमित है। इसलिए किसी व्यक्ति के CEC बनने से पहले किए गए ऐसे कथित काम, जो उसके पुराने पद और जिम्मेदारी से जुड़े हों, उनके मामले में इस सुरक्षा का दायरा अलग सवाल बन जाता है। हालांकि किसी मामले में जांच, FIR या अभियोजन की प्रक्रिया लागू होगी या नहीं, यह संबंधित कानून, परिस्थितियों और अदालत की व्याख्या पर निर्भर करेगा।
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केरल सरकार ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो की जांच का फैसला लिया है। यह फैसला DGP की कानूनी राय के बाद लिया गया बताया गया है। वहीं इस मामले में आरोप साबित होना और अदालत में अभियोजन चलना दो अलग-अलग बातें हैं। किसी जांच का आदेश अपने आप आरोप साबित होने का मतलब नहीं है। धारा 16 के तहत CEC को आधिकारिक चुनावी काम से जुड़ी कानूनी सुरक्षा हासिल है, लेकिन पुराने गैर-चुनावी कार्यों पर यह सुरक्षा स्वतः लागू होती है या नहीं, इसका अंतिम फैसला संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अदालत ही करेगी। ऐसे में फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि 2006 के कथित मामले में CEC पद की इम्युनिटी किस हद तक लागू होती है।
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