Ahmedabad: अहमदाबाद विमान हादसे के एक साल बाद, बचावकर्मियों ने उस दर्दनाक मंजर को याद किया, जब दुर्घटनास्थल पर कई शव बिखरे पड़े थे। उन्होंने बचाव अभियान के दौरान आई मुश्किलों और चुनौतियों को भी याद किया।हादसे के बाद लगी आग इतनी भीषण थी कि शहर की आपातकालीन सेवाओं ने पहले कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया था।चुनौती सिर्फ आग बुझाने तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि इसके लिए तेजी, तालमेल और कई एजेंसियों को शामिल करते हुए सावधानीपूर्वक की गई कार्रवाई की जरूरत थी। Ahmedabad
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पिछले साल 12 जून को लंदन जाने वाली एअर इंडिया की फ्लाइट एआई-171, सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद मेघानीनगर इलाके में बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल कॉम्प्लेक्स से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई।Ahmedabad
एक यात्री बच गया।विमान का मलबा और आग की चपेट में आई इमारतों के अवशेष एक बड़े इलाके में बिखरे पड़े थे। वहीं, घना धुआं और तेज गर्मी के कारण दुर्घटनास्थल तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया था।सिविल अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में घायलों और मृतकों के आने की आशंका को देखते हुए पहले से तैयारी कर ली थी। जैसे ही मरीज अस्पताल पहुंचने लगे, वरिष्ठ डॉक्टरों को तुरंत बुलाया गया और ट्रॉमा टीमों को भी मदद के लिए लाया गया। Ahmedabad:
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सिविल अस्पताल के अधीक्षक राकेश जोशी ने पीटीआई वीडियो को बताया, “हमारे पास प्रोफेसरों और विभागाध्यक्षों का एक समूह है। मैंने उस समूह में सूचना दी कि जो भी डॉक्टर मरीजों की देखभाल में व्यस्त नहीं हैं, वे तुरंत ट्रॉमा सेंटर पहुंचें, क्योंकि इतने बड़े हादसे के बाद ज्यादा से ज्यादा मदद की जरूरत पड़ने वाली थी। करीब 45 से 50 मिनट तक लगातार मरीज आते रहे, जिनकी चोटें अलग-अलग तरह-तरह की थीं।”पूरे शहर में प्राइवेट अस्पतालों ने भी अपने दरवाजे खोल दिए और कई जगहों पर मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई।उधर, जिन अस्पतालों में हादसे के पीड़ितों को लाया जा रहा था, वहां उनके परिजन और रिश्तेदार बड़ी संख्या में पहुंचने लगे। Ahmedabad:
लोग अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पतालों और अन्य जगहों पर भटक रहे थे। उन्हें ये भी नहीं पता था कि उनके अपने जीवित हैं या नहीं। वहीं, जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया था, उनके सामने शवों की पहचान करने की बेहद कठिन और भावुक चुनौती थी।अधिकारियों को एहसास हुआ कि इस काम के लिए अतिरिक्त विशेषज्ञों की आवश्यकता पड़ेगी। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स इसे अब तक की सबसे मुश्किल पहचान प्रक्रियाओं में से एक बताते हैं।पहले 100 डीएनए प्रोफाइल 100 घंटों के भीतर तैयार कर लिए गए। Ahmedabad
फॉरेंसिक साइंस लैब के डायरेक्टर एच. पी. संघवी ने कहा, “एक डीएनए एनालिसिस में 30 से ज्यादा स्टेप्स होते हैं। एक स्टेज पूरा होने के बाद ही पता चलता है कि प्रोफाइल मैच हो रही है या नहीं। हमें जो भी सैंपल मिले, वे बुरी तरह जले हुए थे, इसलिए इस बात की संभावना थी कि पहली बार में पहचान मैच न हो और प्रोसेस को दोबारा करना पड़े।“Ahmedabad
एक साल बाद, दुर्घटनास्थल पर नए हॉस्टल के निर्माण की तैयारी शुरू हो गई है।इस त्रासदी ने बचे हुए लोगों और अपनों को खोने वालों पर गहरी छाप छोड़ी है। कई लोग आज भी अपने दुख से उबरने की कोशिश कर रहे हैं और अपने जीवन को फिर से संभाल रहे हैं, इस उम्मीद के साथ कि किसी और को कभी वह दर्द न सहना पड़े, जो उन्होंने झेला है। A hmedabad:
