उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विधान मंडप में आयोजित 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) आज सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस सम्मेलन के समापन सत्र के दौरान राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने अपना संबोधन दिया।
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अपने संबोधन में हरिवंश ने देश के विधायी निकायों को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर दिया और उत्तर प्रदेश द्वारा किए गए सुधारों की जमकर प्रशंसा की। सम्मेलन के समापन सत्र में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि आर्थिक शक्ति, रणनीतिक क्षमता और तकनीकी प्रगति ही किसी भी राष्ट्र की उन्नति का आधार है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा कि जिस राज्य को कभी नीति आयोग ने ‘समस्याग्रस्त’ कहा था, वह आज राजस्व अधिशेष (Revenue Surplus) और रिफॉर्म-ओरिएंटेड गवर्नेंस के साथ देश का नेतृत्व कर रहा है।

इस दौरान राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने कहा कि यूपी में गरीबी उन्मूलन हुआ है ,2017 से 2025 के बीच यूपी में लगभग 6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।यूपी का लक्ष्य 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है।
राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने तकनीक और परंपरा का बेहतरीन संगम पेश किया है। सम्मेलन में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि कैसे विधायी संस्थाएं जन-कल्याण का माध्यम बन सकती हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा में अवधी, भोजपुरी, बुंदेली और ब्रज जैसी क्षेत्रीय बोलियों के समावेश और डिजिटल उपकरणों के उपयोग को एक मॉडल के रूप में सराहा गया।
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हरिवंश ने कहा कि ”राष्ट्रीय विकास का साझा उद्देश्य तभी पूरा होगा जब हमारी विधायिकाएं और सरकारें भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण के साथ काम करें। प्रधानमंत्री जी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने के लिए राज्यों को अपना रोडमैप तैयार करना होगा, जिसमें उत्तर प्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है।” इस सम्मेलन के निष्कर्षों से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में देश की विधायी संस्थाएं न केवल तकनीक से लैस होंगी, बल्कि समावेशी चर्चाओं के जरिए देश के लोकतंत्र को और भी मजबूत करेंगी।
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