केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की NCORD की 9वीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता

NCORD

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 9वीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने अमृतसर स्थित नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) कार्यालय का भी उद्घाटन किया। NCB द्वारा हाइब्रिड मोड में आयोजित इस बैठक में केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के प्रमुख हितधारकों और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ मादक पदार्थों से संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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अपने संबोधन में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार के सभी विभागों को 2029 तक का एक रोडमैप तैयार करना चाहिए और इसके कार्यान्वयन के लिए समयबद्ध समीक्षा तंत्र स्थापित करना चाहिए। गृहमंत्री ने कहा कि यह चुनौती कानून-व्यवस्था से कहीं अधिक नशीले पदार्थों से जुड़े आतंकवाद से संबंधित है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह देश की आने वाली पीढ़ियों को बर्बाद करने की साजिश है। गृह मंत्री शाह ने कहा कि युवाओं का स्वास्थ्य, उनकी सोचने-समझने और कार्य करने की क्षमता और समाज में बढ़ता असंतोष, ये सभी इस समस्या से जुड़े हुए हैं।

गृहमंत्री ने कहा कि 31 मार्च, 2026 से हम सभी मिलकर इस समस्या के खिलाफ तीन साल का सामूहिक अभियान शुरू करेंगे, जिसमें मादक द्रव्यों के दुरुपयोग के खिलाफ सभी स्तंभों की कार्यप्रणाली को परिभाषित किया जाएगा, लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे और समयबद्ध समीक्षाएं की जाएंगी।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में हमने मादक पदार्थों के विरुद्ध लड़ाई में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है और 2019 में NCORD के पुनर्गठन के बाद हमने इस समस्या पर पूर्ण नियंत्रण की दिशा भी सुनिश्चित कर ली है। अब हमने गति पकड़ ली है और तीन-सूत्रीय कार्य योजना के साथ आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला के प्रति सामूहिक रूप से कठोर दृष्टिकोण, मांग में कमी के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण और नुकसान को कम करने के लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर ही हम नशामुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि NCORD की बैठकों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन इसे और बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिला और राज्य स्तर की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए। शाह ने कहा कि भारत सरकार का दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट है कि नशीले पदार्थों का निर्माण या बिक्री करने वालों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें नशीले पदार्थों के पीड़ितों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

गृहमंत्री ने कहा कि हमें इस लड़ाई में कमान, अनुपालन और जवाबदेही को मजबूत करके ही आगे बढ़ना होगा। अब बैठकों की संख्या पर ध्यान देने के बजाय, हमें उनके परिणामों की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के व्यापार के सरगनाओं, वित्तपोषकों और रसद मार्गों के खिलाफ की गई कड़ी कार्रवाई की समीक्षा होनी चाहिए। गृहमंत्री शाह ने यह भी कहा कि हमें फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (FSL) के उपयोग को शामिल करना चाहिए और समय पर आरोपपत्र दाखिल करने की दर को बढ़ाकर अपने लक्षित अपराधियों को सजा दिलवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे मादक पदार्थ नेटवर्क की जांच के लिए शीर्ष से नीचे और नीचे से ऊपर तक का दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 2004 से 2013 के दौरान 40,000 करोड़ रुपये मूल्य की 26 लाख किलोग्राम नशीली दवाएं जब्त की गईं, जबकि 2014 से 2025 के बीच 1 लाख 71 हजार करोड़ रुपये मूल्य की 1 करोड़ 11 लाख किलोग्राम नशीली दवाएं जब्त की गई हैं। शाह ने कहा कि कृत्रिम नशीली दवाओं के खिलाफ हमारा अभियान उत्साहजनक रहा है। हमने नष्ट की गई नशीली दवाओं की मात्रा में 11 गुना वृद्धि भी हासिल की है। उन्होंने कहा कि 2020 में 10,770 एकड़ भूमि पर अफीम की फसल नष्ट की गई, और नवंबर 2025 तक 40 हजार एकड़ भूमि पर फसल नष्ट कर दी जाएगी।

केंद्रीय गृहमंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे 31 मार्च तक अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार मादक पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए एक कार्यसूची तैयार करें, निगरानी तंत्र स्थापित करें और इस पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करें, ताकि इस समस्या का व्यापक समाधान प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि अगले तीन वर्षों में हमें देश भर में मादक पदार्थों के खिलाफ हर मोर्चे पर लड़ाई लड़नी है और भारत को ‘नशा मुक्त भारत’ बनाना है तथा देश के युवाओं को मादक पदार्थों से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि केवल निरंतर जागरूकता ही हमें सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसी स्थायी प्रणाली बनाना चाहते हैं जो इस लड़ाई को लड़ने में सक्षम हो।

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गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (FSL) की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। जिन राज्यों में जब्त मादक पदार्थों को नष्ट करने की गति धीमी है, उन्हें इसे तेज करना होगा। उन्होंने सभी राज्य पुलिस महानिदेशकों से अपने-अपने राज्यों में एक कार्ययोजना तैयार करने और मादक पदार्थों को समय पर नष्ट करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को हर क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बनाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे भारत के निर्माण के लिए युवा पीढ़ी को नशे से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करना हम सबका दायित्व है।गृहमंत्री शाह ने कहा कि वर्तमान में यह लड़ाई ऐसे मुकाम पर है जहां हम इसे जीत सकते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि हम देश की भावी पीढ़ियों को बचाने के कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे।

NCORD तंत्र की संरचना चार स्तरों वाली है: शीर्ष स्तर की NCORD समिति, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह सचिव करते हैं; कार्यकारी स्तर की NCORD समिति, जिसकी अध्यक्षता गृह मंत्रालय के विशेष सचिव करते हैं। राज्य स्तरीय NCORD समितियाँ, जिनकी अध्यक्षता राज्यों के मुख्य सचिव करते हैं और जिला स्तरीय NCORD समितियाँ, जिनकी अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट करते हैं। NCORD तंत्र की स्थापना 2016 में राज्यों, गृह मंत्रालय और संबंधित हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाने और मादक पदार्थों की समस्या से समग्र रूप से निपटने के लिए की गई थी।

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