Bhopal: US ट्रेड डील के खिलाफ कांग्रेस की किसान महापंचायत की शुरुआत कल होगी।मध्य प्रदेश के भोपाल में किसान महापंचायत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे- राहुल गांधी और अन्य नेता हुंकार भरेंगे। कांग्रेस ने US व्यापार समझौते को ‘सरेंडर’ बताया है। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील यानी व्यापार समझौते के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। कल भोपाल में कांग्रेस एक विशाल ‘किसान महापंचायत’ करने जा रही है। इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी खुद शिरकत करेंगे।
कांग्रेस एक बार फिर किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में है। मुद्दा है— ‘भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता’। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी दबाव में आकर देश के किसानों के हितों का सौदा कर दिया है। कांग्रेस के मुताबिक, इस ट्रेड डील के बाद अमेरिका से सोयाबीन तेल, कपास, मक्का और फलों का आयात आसान हो जाएगा, जिससे भारत के स्थानीय किसानों को भारी नुकसान होगा। पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इसे ‘अतुलनीय आत्मसमर्पण’ करार दिया है। Bhopal Bhopal Bhopal Bhopal
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प्रमुख मुद्दे: क्यों हो रहा है विरोध?
सस्ते आयात का डर: अमेरिका से ड्यूटी-फ्री (कर मुक्त) सोयाबीन तेल और मक्का आने से भारतीय बाजार में दाम गिरेंगे।
कपास उत्पादकों पर संकट: समझौते की शर्तों के कारण भारतीय गारमेंट सेक्टर को नुकसान होने की आशंका।
हल्की जल्दबाजी का आरोप: कांग्रेस का दावा है कि सरकार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए था, जिससे भारत को बेहतर डील मिल सकती थी।
खाद्य सुरक्षा: विदेशी उत्पादों के दबदबे से छोटे किसानों की आजीविका पर सीधा खतरा। Bhopal
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि”यह समझौता नहीं, हमारे किसानों की गर्दन पर तलवार है।केंद्र सरकार ने अमेरिकी बाजार सजाने के लिए मध्य प्रदेश के सोयाबीन और कपास किसानों को बर्बाद करने की सुपारी ली है। राहुल जी और खड़गे जी भोपाल से इस अन्याय के खिलाफ शंखनाद करेंगे।” मध्य प्रदेश से शुरू हो रहा यह आंदोलन आने वाले दिनों में महाराष्ट्र और राजस्थान तक फैलेगा। कांग्रेस 7 मार्च को महाराष्ट्र के यवतमाल में किसान महापंचायत करने वाली है तो वही राजस्थान के श्रीगंगानगर में भी किसान महापंचायत होगीअब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस का यह ‘किसान कार्ड’ सरकार को बैकफुट पर लाने में कामयाब हो पाता है या नहीं।
