BIG NEWS: 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा से लौट रहे काफिले पर हुआ था घातक हमला, कई बड़े नेताओं समेत दर्जनों लोगों की गई थी जान
NEWS DESK: छत्तीसगढ़ का झीरम घाटी नक्सली हमला देश के सबसे भयावह राजनीतिक-सुरक्षा हमलों में गिना जाता है। 25 मई 2013 की शाम बस्तर के दरभा इलाके की झीरम घाटी में कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ से लौट रहे नेताओं के काफिले को माओवादियों ने घेरकर हमला किया था। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार हमला करीब शाम 4:15 बजे हुआ और इसमें 27 लोगों की मौत हुई, जबकि 38 लोग घायल हुए थे। हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख लोग मारे गए। अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 29 या 32 भी बताई गई है, क्योंकि घटना में बाद की मौतों और अलग-अलग श्रेणियों को शामिल करने का तरीका अलग रहा है। लेकिन यह स्पष्ट है कि हमले ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को लगभग खत्म कर दिया था।BIG NEWS
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हमला उस समय हुआ जब कांग्रेस नेता विधानसभा चुनाव से पहले चल रही परिवर्तन यात्रा के तहत बस्तर के सुकमा क्षेत्र में कार्यक्रम के बाद वापस लौट रहे थे। घने जंगल और पहाड़ी रास्ते में माओवादियों ने काफिले को निशाना बनाया। इस हमले में सुरक्षाकर्मी भी मारे गए और हथियार व अन्य सामान लूटे गए। घटना की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की, लेकिन 27 मई 2013 को केंद्र सरकार के आदेश के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने केस अपने हाथ में ले लिया। NIA ने 2014 में नौ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और 2015 में 30 अन्य आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद मामला लंबे समय तक अदालत में चला। सुनवाई के दौरान 294 से ज्यादा पेशियां हुईं और 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इस मामले में सबसे बड़ा विवाद हमले के पीछे कथित बड़ी साजिश की जांच को लेकर भी रहा। इसी वजह से झीरम घाटी कांड सिर्फ नक्सली हमले का मामला नहीं रहा, बल्कि वर्षों तक राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय भी बना रहा।BIG NEWS
अब 5 सितंबर 2026 को इस मामले में एक बड़ा न्यायिक पड़ाव आया है। NIA की विशेष अदालत ने सुनवाई के बाद मामले के सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। यानी 13 साल से चल रही इस कानूनी लड़ाई में
अदालत ने आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी को लेकर अपना फैसला सुना दिया है। हालांकि, दोषी ठहराए जाने और सजा सुनाए जाने की प्रक्रिया अलग होती है, इसलिए दोषियों को मिलने वाली सजा पर भी नजर बनी हुई है। इस मामले की लंबी सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि झीरम घाटी हमला सिर्फ कई परिवारों के लिए अपनों को खोने की त्रासदी नहीं था, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी इसका गहरा असर पड़ा था। 13 साल बाद आया यह फैसला पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जबकि मामले से जुड़े बड़े षड्यंत्र और फरार आरोपियों को लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई पर भी नजर रहेगी।B
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