लद्दाख के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ( Vinai Kumar Saxena ) ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ( Sonam Wangchuk ) की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत रद्द करने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम बताया।
हालांकि, सक्सेना ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में आंदोलन और हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और लोगों की आकांक्षाओं और चिंताओं से जुड़े सभी मुद्दों को हितधारकों के साथ संवाद के जरिए सुलझाया जाएगा।
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केंद्र ने शनिवार को कहा है कि उसने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। उन्हें लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद करीब छह महीने पहले गिरफ्तार किया गया था, जिनमें चार लोगों की मौत हो गई थी।
केंद्र के अनुसार, ये फैसला लद्दाख में शांति को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है। ये निर्णय उस समय आया है, जब उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो द्वारा उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 17 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी थी। Sonam Wangchuk
वांगचुक को लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और उसे संविधान की छठी अनुसूची के तहत शामिल करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दो दिन बाद 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था।

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उप-राज्यपाल कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा कि विनय कुमार सक्सेना ने वांगचुक की हिरासत रद्द करने के फैसले का स्वागत किया और उन्होंने कहा कि यह लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने की दिशा में केंद्र का सकारात्मक कदम है। Sonam Wangchuk
‘X’ पर किए पोस्ट में उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने ये भी कहा कि, “लद्दाख में आंदोलन और हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और लोगों की आकांक्षाओं व चिंताओं से जुड़े सभी मुद्दों को कई हितधारकों, सामुदायिक नेताओं और नागरिकों के साथ संवाद के माध्यम से सुलझाया जाएगा।”
