दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग ने सभी थोक लाइसेंसधारियों को निर्देश दिया है कि शहर में बिकने वाली शराब की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हर 3 महीने में हर रजिस्टर्ड IMFL ब्रांड का सैंपल अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि दिल्ली में मंजूर सभी इंडियन मेड फॉरेन लिकर ब्रांड को हर 3 महीने में नियमित रूप से टेस्टिंग के लिए सरकार की एक्साइज कंट्रोल लैब से गुजरना जरूरी होगा। विभाग ने हाल ही में सभी एल-1 लाइसेंसधारियों को एक सर्कुलर जारी कर इस निर्देश का सख्ती से पालन करने को कहा है। अधिकारियों ने बताया कि 2024-25 में लैब ने विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए शराब के 2,740 सैंपलों की जांच की थी।
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2021 का विधेयक
दिल्ली को 32 जोन में विभाजित किया गया था, जिसमें प्रत्येक जोन में 27 शराब की दुकानें थीं। इसका उद्देश्य शराब माफिया और कालाबाजारी को समाप्त करना, राजस्व बढ़ाना और उपभोक्ता अनुभव को बेहतर बनाना तथा शराब की दुकानों का समान वितरण सुनिश्चित करना था।
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इससे सरकार द्वारा शराब की बिक्री से बाहर निकलने का संकेत मिला- शहर में केवल निजी शराब की दुकानें ही चलेंगी, और प्रत्येक नगर निगम वार्ड में 2-3 दुकानें होंगी। सरकार ने लाइसेंसधारियों के लिए नियमों को लचीला बनाया है, जैसे कि उन्हें छूट देने और सरकार द्वारा निर्धारित MRP पर बेचने के बजाय अपनी कीमतें खुद तय करने की अनुमति देना।
