Delhi: दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने शुक्रवार को छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे जंतर-मंतर या उसके आस-पास होने वाले प्रदर्शनों में शामिल न हों और न ही वहां जाएं। साथ ही, उनसे कहा गया कि वे चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच अपनी निजी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से व्यवहार करें। Delhi:
विश्वविद्यालय के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी एक सलाह में कहा गया कि जेएनयू की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी लोगों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए और सार्वजनिक प्रदर्शनों पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए जंतर-मंतर के आस-पास प्रदर्शन वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए।पोस्ट में कहा गया है, “जेएनयू की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी लोगों को जिम्मेदारी से काम करने और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है। सार्वजनिक प्रदर्शनों से जुड़े भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, आपसे अनुरोध है कि नयी दिल्ली के जंतर-मंतर या उसके आसपास होने वाले किसी भी जमावड़े में शामिल होने या वहां जाने से बचें।
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छात्रों ने इस सलाह पर संदेह जताया। उन्हें लग रहा है कि ये सलाह उन्हें विरोध-प्रदर्शन से दूर रखने का एक तरीका है। हालांकि, उनका कहना है कि इससे उन छात्रों को नहीं रोका जा सकेगा जो विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने का मन बना चुके हैं।विश्वविद्यालय ने छात्रों और कर्मचारियों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय जिम्मेदारी बरतने की सलाह भी दी है। साथ ही चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर लागू कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है और विश्वविद्यालय की आचार संहिता के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।इसमें आगे कहा गया, “आपको शैक्षणिक जिम्मेदारी और जिम्मेदार नागरिकता के मूल्यों को बनाए रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है।”
ये सलाह ऐसे समय में आई है जब जंतर-मंतर के पास कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं, जिसके कारण मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और परिवहन पर पाबंदियां लगाई गई हैं।ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों की ओर से विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े विवाद पर कई संदेश जारी किए गए हैं।दिल्ली विश्वविद्यालय के अदिति महाविद्यालय ने छात्रों से हिंसा से दूर रहने और केवल शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से हिस्सा लेने की अपील की है।Delhi:
वहीं श्याम लाल कॉलेज ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में एक संदेश पोस्ट किया। इससे पहले, राजधानी कॉलेज ने छात्रों और शिक्षकों के कुछ वर्गों की आलोचना के बाद ऐसी एक पोस्ट हटा ली थी और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी।शिक्षकों के समूहों ने राजनीतिक रूप से विवादित मुद्दे पर शैक्षणिक संस्थानों के सार्वजनिक रुख अपनाने पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि विश्वविद्यालयों को इसके बजाय परीक्षा प्रणाली और चल रहे शैक्षणिक सुधारों को लेकर छात्रों की चिंताओं को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।
