भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण परमाणु करार, PM ने प्रधानमंत्री अल्बनीज के साथ की द्विपक्षीय वार्ता

Delhi: पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर है इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता हुई है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच मेलबर्न में सम्पन्न तीसरे वार्षिक शिखर सम्मेलन में 18 महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी है।इनमें मुख्य रूप से लंबे समय से अटके यूरेनियम आपूर्ति सौदे को आगे बढ़ाना, क्रिटिकल मिनरल्स महत्वपूर्ण खनिज कॉरिडोर विकसित करना और रक्षा, समुद्री सुरक्षा व स्वच्छ ऊर्जा के समझौते शामिल हैं।

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वही मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ग्लोबल सप्लाई चेन के संकट के बीच, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने एक बेहद मजबूत और रणनीतिक कदम उठाया है। संयुक्त बयान में दोनों देशों ने साफ कर दिया है कि वे दुनिया की किसी भी उठापटक के आगे झुकने वाले नहीं हैं।भारत और ऑस्ट्रेलिया ने यूरेनियम के निर्यात के लिए जरूरी सभी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया है। यानी, साल 2015 के परमाणु सहयोग समझौते के तहत अब ऑस्ट्रेलिया से भारत को परमाणु ईंधन यानी यूरेनियम की सप्लाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह यूरेनियम विशुद्ध रूप से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होगा और IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) की निगरानी में रहेगा।

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वही मिडिल ईस्ट के हालातों पर दोनों देशों ने गहरी चिंता जताई है। बयान में कहा गया है कि जिस तरह से ऊर्जा, तेल और कमोडिटी की कीमतों पर असर पड़ रहा है, उसे देखते हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को और मजबूत करेंगे।​इस डील की बड़ी बातें: कोयला, डीजल और गैस की अटूट सप्लाई: ऑस्ट्रेलिया भारत को लगातार LNG और कोयला देता रहेगा, जबकि भारत ऑस्ट्रेलिया को लिक्विड फ्यूल (पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स) की सप्लाई जारी रखेगा।प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा:दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने के लिए ECTA और आने वाले समय में CECA समझौते के तहत निवेश बढ़ाया जाएगा।

​ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस : ऑस्ट्रेलिया ने भारत की पहल ‘ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस’ की तारीफ की है और दोनों देश मिलकर कम कार्बन वाले ईंधन पर काम करेंगे।​इलेक्ट्रिफिकेशन पर जोर: भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए दोनों देश अपने सिस्टम में बिजली के इस्तेमाल (Electrification) को तेजी से बढ़ाएंगे।प्रशांत महासागरीय देशों की चिंता: दोनों देशों ने पैसिफिक आइलैंड देशों की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी प्रतिबद्धता जताई है।

​इस डील के साथ ही भारत और ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया के बाकी देशों को भी एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने क्षेत्रीय साझेदारों से अपील की है कि वे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन को खुला रखें ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, समृद्धि और खुली अर्थव्यवस्था बनी रहे। ऊर्जा के क्षेत्र में यह जुगलबंदी आने वाले दिनों में चीन और अन्य वैश्विक ताकतों के लिए एक बड़ा रणनीतिक जवाब मानी जा रही है। Delhi:

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