MADHYA PRADESH: जबलपुर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने कुछ ही दिनों में कई लोगों से लगभग 1.75 करोड़ रुपये की ठगी की। एसपी संपत उपाध्याय के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच ने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए इस गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह को एक ही परिवार चला रहा था, जिसका मुखिया पन्नालाल राठौर था और उसके साथ उसके बेटे और पत्नी भी शामिल थे। उनका तरीका ये था कि वे खुद को मजदूर बताते थे और ऐसे लोगों के पास जाते थे जिन्हें उन पर शक न हो। वे दावा करते थे कि खुदाई के काम के दौरान उन्हें जमीन में गड़ा हुआ सोना मिला है। पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए, वे शुरुआत में उन्हें जांच के लिए 5 से 10 ग्राम की मात्रा में असली सोना देते थे।
एक बार जब पीड़ितों को सोने के असली होने का यकीन हो जाता था, तो आरोपी लाखों और करोड़ों रुपये के सौदे कर लेते थे। लेकिन, पैसे मिलने के बाद वे पीड़ितों को नकली सोने के सिक्के या पीतल की ईंटें थमाकर वहां से फरार हो जाते थे। पुलिस की जांच में तीन बड़ी घटनाओं का खुलासा हुआ है। एक अप्रैल को, एक पीड़ित से सात किलोग्राम नकली सोने के बदले 10 लाख रुपये की ठगी की गई। तीन अप्रैल को, भेड़ाघाट इलाके में, इस गिरोह ने खुदाई के काम से जुड़े डर का फायदा उठाकर 50 लाख रुपये की वसूली की और बदले में पांच किलोग्राम पीतल की सिल्लियां थमा दीं। सबसे बड़ी ठगी चार अप्रैल को हुई, जब आरोपियों ने 12 किलोग्राम नकली सोने के बिस्किट देकर एक करोड़ रुपये हड़प लिए।
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MADHYA PRADESH- क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की तकनीकी निगरानी के बाद, आरोपियों का पता उत्तर प्रदेश के झांसी में चला। तुरंत एक पुलिस टीम को वहां भेजा गया, जिसके परिणामस्वरूप गिरोह के चारों सदस्यों- पन्नालाल राठौर (60), धर्मेंद्र (34), वीरेंद्र (30) और रानूदेवी (52) को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी मूल रूप से हरियाणा के फरीदाबाद का रहने वाला है और पनागर में एक किराए के मकान से अपना काम चला रहा था।
छापेमारी के दौरान, पुलिस ने 1.55 करोड़ रुपये नकद, सैंपल के तौर पर इस्तेमाल किया गया 84 ग्राम असली सोना, 20 किलोग्राम नकली सोना, साथ ही 11 मोबाइल फोन और दूसे आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए। थाना प्रभारी शैलेश मिश्रा और सब-इंस्पेक्टर प्रभाकर सिंह समेत दूसरे पुलिसकर्मियों ने इस मामले को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने अब गिरोह के कामकाज का विस्तार से पता लगाने और ये जानने के लिए आगे की जांच शुरू कर दी है कि क्या दूसरे राज्यों में भी इसी तरह की धोखाधड़ी की गई थी।
