PM मोदी ने पेरिस स्पेस समिट में भारत की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि अंतरिक्ष का फायदा पूरी मानवता तक पहुंचना चाहिए…पूरी खबर
NEWS DESK: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पेरिस में आयोजित इंटरनेशनल स्पेस समिट को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के अगले बड़े लक्ष्यों का जिक्र किया। PM मोदी ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2035 तक अपना भारतीय स्पेस स्टेशन स्थापित करना है। इसके बाद 2040 तक एक भारतीय को चंद्रमा पर भेजने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरिक्ष के सुरक्षित और टिकाऊ इस्तेमाल का समर्थन करता है और अंतरिक्ष से जुड़ी संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पीएम मोदी ने चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 मिशन का भी जिक्र किया। PM मोदी ने कहा कि चंद्रयान-3 ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल लैंडिंग करने वाला पहला देश बनाया, जबकि आदित्य-L1 सूर्य के अध्ययन में महत्वपूर्ण काम कर रहा है।
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PM मोदी ने अपने संबोधन में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की मेहनत की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा सिर्फ सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश का निजी स्पेस सेक्टर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि ISRO की तकनीक और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां भारत के साथ-साथ दुनिया के लिए भी उपयोगी साबित हो रही हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरिक्ष से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी और तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों के आधार पर सुरक्षित और टिकाऊ स्पेस डोमेन के पक्ष में है। पेरिस में आयोजित इंटरनेशनल स्पेस समिट में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि अंतरिक्ष क्षेत्र की तकनीक, सुरक्षा, निवेश और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।
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भारत अब अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। 2035 तक भारतीय स्पेस स्टेशन और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय भेजने का लक्ष्य इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। PM मोदी ने फ्रांस और दूसरे देशों को भारत के अगले चरण के स्पेस रिसर्च में साझेदार बनने का न्योता भी दिया। भारत और फ्रांस पहले से ही अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग करते रहे हैं और दोनों देशों के बीच पृथ्वी की निगरानी, उन्नत तकनीक और मानव अंतरिक्ष मिशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर है।
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