कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने सरकार का पूरा अभिभाषण पढ़ने से इनकार करने पर राज्यपाल की आलोचना की

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Priyank Kharge : कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत की आलोचना करते हुए उन पर विधानसभा के इस वर्ष के पहले सत्र में सरकार का पूरा अभिभाषण पढ़ने से इनकार कर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन’’ करने का आरोप लगाया।मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक ‘पोस्ट’ में कहा कि ये बेहद खेदजनक है कि राज्यपाल सरकार का भाषण पूरा नहीं पढ़ने का विकल्प चुन रहे हैं जबकि संविधान इस बारे में स्पष्ट है।Priyank Kharge 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र प्रियांक खरगे ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 176 के तहत राज्यपाल को साल के पहले सत्र में विधानसभा को संबोधित करना होता है और ये अभिभाषण निर्वाचित सरकार का नीतिगत वक्तव्य होता है, न कि उनके व्यक्तिगत विचार। इसे मंत्रिमंडल तैयार करता है और संवैधानिक रूप से उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे इसे निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रस्तुत करें।Priyank Kharge Priyank Kharge Priyank Kharge

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सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी विभाग का प्रभार संभाल रहे खरगे ने कहा कि पूरा भाषण नहीं पढ़ना अनुच्छेद 176 का उल्लंघन है और ये उस अनुच्छेद 163 के भी खिलाफ है जिसके तहत राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर कार्य करना होता है।उन्होंने कहा कि संबंधित अभिभाषण पूरी तरह तथ्यों पर आधारित है और कर्नाटक सरकार की आधिकारिक स्थिति को दर्शाता है।खरगे ने कहा कि कर्नाटक को उसके हक के धन से वंचित किए जाने और सहकारी संघवाद के टूटने का मुद्दा मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के समक्ष बार-बार उठाया है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके बावजूद सरकार ने संवैधानिक मर्यादा और पद की गरिमा का ध्यान रखते हुए ये संदेश दिया कि अगर वास्तविक चिंताएं हैं तो भाषा में सीमित बदलाव पर विचार किया जा सकता है लेकिन पूरे हिस्से हटाने पर जोर देना स्वीकार्य नहीं है और ये कर्नाटक के लोगों के हितों के खिलाफ है।खरगे ने आरोप लगाया कि गहलोत की ये कार्रवाई पक्षपातपूर्ण हस्तक्षेप के अलावा कुछ नहीं है और ये राज्यपाल के पद की संवैधानिक भूमिका और निष्पक्षता को कमजोर करती है और ‘‘इससे ये गंभीर सवाल उठता है कि वास्तव में फैसले कौन कर रहा है।Priyank Kharge Priyank Kharge

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सरकारी सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ पर नकारात्मक टिप्पणियों से नाखुश थे। ये योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह शुरू की गई है।सूत्रों ने’ को बताया कि गहलोत चाहते थे कि इस विषय से संबंधित दो पैराग्राफ हटा दिए जाएं जबकि सरकार उन्हें बरकरार रखने पर अडिग रही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दो वाक्य हटाने पर सहमत हो गई

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