हरियाणा ( रिपोर्ट – श्याम बाठला ): रेवाड़ी नगर परिषद में पहले ट्रैफिक लाईट , सीसीटीवी कैमरे , सफाई के नाम पर , स्ट्रीट लाईट , शहर की सड़कों के नाम पर और अब रेवाड़ी नगर परिषद का एक ओर बड़ा कारनामा । शहर में 50 लाख की लागत से लगे अंडरग्राउंड स्मार्ट डस्टबिन जिसमें ना सेंसर लगा है ना साफ्टवेयर, पैसे व डस्टबिन दोनों बेकार ।
अधिकारियों ने शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर लाखों रुपए के अंडरग्राउंड स्मार्ट डस्टबिन लगा दिए मगर इसके बाद जैसे दावे किए गए थे धरातल पर नजर नही आते जबकि हकीकत तो यह है कि उस हिसाब से इन स्मार्ट डस्टबिन का इस्तेमाल तक नहीं किया गया ना ही इनके अंदर सेंसर लग पाए और ना ही सॉफ्टवेयर डाला गया ताकि भरने पर डस्टबिन से सायरन बजे और अधिकारी ऑटोमेटिक तरीके से कंपैक्टर मशीन भेज कर इन्हें खाली करा सकें ।
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नगर परिषद का खजाना तो खाली हुआ बाकी कोई प्लानिंग पूरी नहीं हुई अधिकारी बताते हैं कि शहर में 8 जगह पर यह डस्टबिन लगाए हुए है जिन पर 50 लाख से ज्यादा की राशि खर्च की गई । इतनी मोटी रकम को अधिकारियों ने सिर्फ स्मार्ट डस्टबिन का प्रयोग करके देखने पर खर्च कर दी जबकि अब इन डस्टबिनो का इस्तेमाल सामान्य डस्टबिन की तरह ही हो रहा है।
2018-19 में इन स्मार्ट डस्टबिन को लगाने के लिए योजना तैयार की गई थी । तत्कालीन डीसी की पहल पर नगर परिषद ने इसका खाका तैयार किया इस योजना के साथ भारी भरकम राशि खर्च की गई ताकि इन डस्टबिन से शहर सुंदर दिखे और आसपास के क्षेत्रों में कूड़ा नजर नहीं आए लेकिन अब जिन भी आठ जगहों पर यह डस्टबिन लगे हैं उनका बुरा हाल है डस्टबिन में कोई सेंसर काम नहीं करने से कूड़ेदान भर जाते हैं तथा कचरा आस पास फैल जाता है हालांकि सफाई होने पर कुछ बेहतर स्थिति नजर आती है मगर डस्टबिन को जिस मकसद से लगाया गया था वह कभी पूरा नहीं हुआ ।
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