केदारनाथ धाम की पवित्रता बनाए रखने के लिए उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन और नगर पंचायत केदारनाथ ने ‘कैरी मी बैक’ अभियान की शुरुआत की है। यह पहल हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए शुरू की गई है।
बाबा केदार के दर्शन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालुओं के सैलाब के बीच केदारनाथ धाम को स्वच्छ रखने के लिए प्रशासन ने एक अनोखी पहल शुरू की है। ‘कैरी मी बैक’ अभियान के तहत अब श्रद्धालु अपने साथ लाया गया सूखा कूड़ा वापस गौरीकुंड तक लाएंगे। इस पहल का मकसद सीधा-सा है – केदारनाथ आने वाले लोगों को इस बात के लिए बढ़ावा देना कि वे अपने पीछे ऐसी कोई भी चीज़ न छोड़ें जो बाद में कूड़ा बन जाए। अब तीर्थयात्रियों से यह उम्मीद की जाएगी कि वे ऐसी चीज़ों को गौरीकुंड में बनाए गए खास कलेक्शन सेंटरों में जमा कराएँ।
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हिमालय में स्थित इस पवित्र तीर्थस्थल पर आने वाले लोगों की बढ़ती संख्या अपने साथ सूखे कूड़े के प्रबंधन की चुनौती भी ले आई है। वहीं स्थानीय अधिकारी यह पक्का करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि कूड़े के ये पहाड़ हिमालय के नाज़ुक पर्यावरण को नुकसान न पहुँचा पाएं। इस अभियान के तहत श्रद्धालुओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे केदारनाथ से वापस लौटते समय अपने साथ एक बैग में सूखा कूड़ा (जैसे प्लास्टिक की बोतलें, रैपर्स) भरकर लाएं और यह कचरा गौरीकुंड में बने विशेष कलेक्शन सेंटर या मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) पर जमा कराएं।
