देश के एक उद्यमी जिसकी एक दशक पहले सूखे में पूरी फसल बर्बाद हो गई थी, कर्नाटक में महंगे मसाले और औषधीय पौधे उगाने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई)-लैस हाइड्रोपोनिक खेती में 214 करोड़ रुपये निवेश कर रहे हैं। मैंगलोर की पनामा हाइड्रो-एक्स के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विवेक राज ने कहा कि कंपनी ने कई साल तक शोध एवं विकास पर 146 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद चार पेटेंट वाली एआई प्रौद्योगिकी विकसित की हैं।
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एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन 2026 में आए राज ने बताया कि इन प्रौद्योगिकी में ऐसे प्रणाली शामिल हैं जो फसल की बीमारियों का प्रत्यक्ष लक्षण दिखने से पहले पता लगा सकती है और प्रकाश संश्लेषण के लिए अधिकतम कृत्रिम रोशनी दे सकती हैं। 40 वर्षीय राज का निजी नेटवर्थ 70 करोड़ डॉलर है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें परीक्षण अवधि के दौरान अच्छे परिणाम मिले हैं और हमें ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया से अपनी एआई प्रौद्योगिकी के लिए पेटेंट मिले हैं।’’ उन्होंने कहा कि हम इसे बड़े पैमाने पर लागू करेंगे।’’
राज की पनामा कॉरपोरेशन द्वारा वित्तपोषित एक सीमित दायित्व वाली साझेदारी है, ‘‘जो हाइड्रोप्रोनिक खेती के लिए 214 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।’’ कंपनी ने कर्नाटक के मूडबिद्री में पहले ही 16 एकड़ (6.5 हेक्टेयर) खेती की ज़मीन खरीद ली है, जहां वह वर्ष 2026 के आखिर तक हाइड्रोपोनिक खेती का बुनियादी ढांचा बनाएगी। पहली वाणिज्यिक फसल जून, 2027 में होने की उम्मीद है।
इस उपक्रम की योजना केसर और अदरक के लिए पांच-पांच एकड़ जमीन देने की है, और बाकी छह एकड़ ज़मीन हल्दी और अश्वगंधा सहित नौ औषधीय पौधों के लिए है। राज ने कहा कि केसर और अदरक को कॉस्मेटिक और दवा कंपनियों को निर्यात किया जाएगा, जबकि औषधीय फसलें देश में बेची जाएंगी।
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तीन गुना पैदावार में वृद्धि
विवेक राज ने कहा कि परीक्षण के दौरान, एआई वाली हाइड्रोपोनिक खेती से हर एकड़ में 1,200 बैग अदरक का उत्पादन हुआ, जबकि पारंपरिक खुली खेती से 400 बैग का उत्पादन होता था, और हर बैग का वज़न 60 किग्रा था। यह प्रौद्योगिकी एक के बजाय तीन सालाना फसल चक्र भी मुमकिन बनाती है।
राज ने कहा, एक बात की मैं गारंटी दे सकता हूं कि फसल नहीं खराब होगी।’’ हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी तुरंत प्रौद्योगिकी का लाइसेंस नहीं देगी, बल्कि पहले वाणिज्यिक सफलता दिखाना पसंद करेगी। वहीं भारत और अमेरिका में पंजीकृत पनामा हाइड्रो-एक्स, मैंगलोर में 37 इंजीनियरों को काम पर रखने की योजना बना रही है।
विपदा से नवाचार की ओर
विवेक राज का कृषि प्रौद्योगिकी में प्रवेश व्यक्तिगत नुकसान से प्रेरित है। 2013-14 में चिक्कमंगलुरू जिले में भीषण सूखे ने उनकी 5,000 एकड़ अदरक की पूरी फसल को नष्ट कर दिया, जिससे पनामा नेचर फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड को भारी नुकसान हुआ, जिसकी स्थापना उन्होंने 2014 में किसानों को अग्रिम भुगतान करके की थी।
राज ने कहा, सूखे के कारण मेरी पूरी फसल बर्बाद हो गई। मैंने किसानों को पांच साल का पैसा अग्रिम दे दिया था। अगर कोई और उद्यमी होता, तो वह आत्महत्या कर लेता।” सरकारी कर्ज माफी योजना में किसानों को तो शामिल किया गया था, लेकिन कृषि उद्यमियों को नहीं, जिससे राज को 2016 में इनडोर खेती के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश करने की प्रेरणा मिली। कंपनी को वर्ष 2021 में ऑस्ट्रेलिया से अपना पहला पेटेंट मिला।
वर्ष 2004 में शुरू हुई, पनामा कॉरपोरेशन एक मिनरल ट्रेडिंग कंपनी के तौर पर शुरू हुई, जो 70 से ज़्यादा देशों में 35 तरह के खनिज प्राप्त करती थी। फर्म ने एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित किए। समूह की प्रौद्योगिकी इकाई पनामा एग्री इनोवेशन्स, केसर, हिमालयी मशरूम और औषधीय वनस्पतियों समेत महंगी फसलों के लिए एआई-सहायतायुक्त हाइड्रोपोनिक प्रणाली विकसित करती है।
