Gujarat: गुजरात में एक महीने तक चलने वाले ‘ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम’ अभियान के पहले 14 दिनों में, राज्य की पुलिस ने अलग-अलग हिस्सों से 84 बाल मजदूरों को बचाया और 26 आरोपियों के खिलाफ 16 आपराधिक मामले दर्ज किए हैं। ‘ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम’ नाम का ये अभियान बाल श्रम के खिलाफ है। इस अभियान के तहत औद्योगिक इलाकों, कमर्शियल प्रतिष्ठानों और असंगठित श्रम इकाइयों में सख्ती बढ़ाई गई है, जहां बच्चे श्रम कानूनों का उल्लंघन करके काम करते पाए गए थे। Gujarat
उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी की अगुवाई में पुलिस द्वारा शुरू की गई इस पहल का मकसद ये पक्का करना है कि “हर बच्चा स्कूल में हो, न कि काम पर”। हर्ष संघवी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “जो लोग बच्चों से उनका बचपन छीनकर उन्हें मजदूरी करने पर मजबूर करते हैं, उन्हें किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। राज्य सरकार का मकसद साफ है – गुजरात से बाल श्रम को खत्म करना और बच्चों की गरिमा और शिक्षा की रक्षा करना।” Gujarat
एक सरकारी बयान के अनुसार, गुजरात पुलिस ने ‘ऑपरेशन चाइल्डहुड फ्रीडम’ नाम के महीने भर चलने वाले राज्य-व्यापी अभियान के पहले 14 दिनों में 84 बाल मजजूरों को बचाया और 26 आरोपियों के खिलाफ 16 आपराधिक मामले दर्ज किए। सूरत शहर में पुलिस ने एक सूचना मिलने पर ‘जय अम्बे टेक्सटाइल्स’ नाम की टेक्सटाइल यूनिट पर छापा मारा और दो नाबालिग लड़कों को बचाया, जिनसे कथित तौर पर शोषणकारी हालात में काम करवाया जा रहा था। बयान में कहा गया है कि शुरुआती जांच से पता चला है कि बच्चों को रोजाना सिर्फ 200 रुपये दिए जा रहे थे, जो कानूनी और नैतिक श्रम मानकों से बहुत कम है। Gujarat
गुजरात पुलिस ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “सिर्फ 14 दिनों में गुजरात पुलिस ने होटलों, टेक्सटाइल यूनिट्स और फैक्टरियों में छापे मारे, 16 मामले दर्ज किए और 26 आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की।” पुलिस को ये भी पता चला कि जब नाबालिगों ने लगातार काम करने से मना किया, तो उन्हें कथित तौर पर उनकी मर्जी के बिना काम पर वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया। Gujarat
अधिकारियों ने बताया कि बच्चों से सुबह आठ बजे से शाम सात बजे तक काम करवाया जाता था और उन्हें लंच के लिए सिर्फ एक घंटे का ब्रेक मिलता था; इस दौरान उन्हें लंबे समय तक शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ता था। टेक्सटाइल यूनिट से बचाए गए बच्चों को तुरंत सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया, जबकि मालिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। Gujarat
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सीनियर आईपीएल अधिकारी ने कहा कि इस अभियान का मकसद बच्चों के शोषण को तुरंत रोकने के साथ-साथ इसे जड़ से खत्म करने के लिए सिस्टम में सुधार करना है। वहीं अधिकारियों ने बताया कि अब ये ऑपरेशन सिर्फ अलग-अलग मालिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बाल श्रम की सप्लाई करने वाले कॉन्ट्रैक्टर और सप्लाई-चेन नेटवर्क को भी खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा, “हमारा ध्यान सिर्फ बच्चों को छुड़ाने पर ही नहीं, बल्कि बाल मजदूरों को काम पर रखने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने पर भी है। बाल मजदूरी में शामिल मालिकों, ठेकेदारों और इसमें मदद करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”
मामलों की शुरुआती जांच से पता चलता है कि गरीबी, पलायन, स्कूल छोड़ने और सस्ते मजदूरों की मांग बाल मजदूरी के मुख्य कारण हैं। अधिकारी अब इस समस्या को रोकने के लिए खुफिया जानकारी के आधार पर जांच, अचानक छापेमारी और श्रम विभागों, बाल कल्याण समितियों, एनजीओ और शिक्षण संस्थानों के साथ बेहतर तालमेल बनाने की योजना बना रहे हैं। पुलिस ने मुश्किल हालात में काम करने को मजबूर नाबालिगों को छुड़ाने के लिए एक चरणबद्ध रणनीति अपनाई है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि अगले चरणों में बार-बार अपराध करने वाले नेटवर्क को तोड़ने और बचाए गए बच्चों के लंबे समय तक पुनर्वास को सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाएगा। जारी बयान के अनुसार, इस पहल के तहत पुलिस का लक्ष्य 50,000 से ज्यादा जगहों की जांच करना, 10,000 खुफिया जानकारियां जुटाना और 5,000 से ज्यादा बाल मजदूरों को छुड़ाना है। अधिकारियों ने नियोक्ताओं, व्यापारियों और फैक्टरी मालिकों को बाल श्रम कानूनों और शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए अपने प्रयासों को और तेज कर दिया है। साथ ही, उन्होंने इस ऑपरेशन के मुख्य संदेश पर भी जोर दिया है कि किसी भी बच्चे को मजदूरी के कारण स्कूल जाने से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। Gujarat
