Parliament: मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया पर लोकसभा में गरमाई सियासत, के.सी. वेणुगोपाल ने दी ये प्रतिक्रिया

Parliament: लोकसभा में सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने इस बात पर बहस की कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के चयन हेतु गठित समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश को सदस्य के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। चुनाव सुधार’ विषय पर हुई बहस में भाग लेते हुए कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार से मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति हेतु गठित चुनाव समिति से मुख्य न्यायाधीश को बाहर रखने पर सवाल उठाया। Parliament:

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सेवानिवृत्त हो चुके न्यायाधीश के.एम. जोसेफ की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने निर्देश दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी कानून बनने तक चयन समिति में प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता को सदस्य के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।लेकिन जब सरकार ने इस विषय पर विधेयक पेश किया, तो उसने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक चयन समिति का प्रस्ताव रखा, जिसमें प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता सदस्य होंगे। Parliament:

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बाद में यह विधेयक संसद द्वारा पारित कर दिया गया।वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश को शामिल न किए जाने पर सवाल उठाया और कानून मंत्री से इस पर जवाब मांगा।वेणुगोपाल के तुरंत बाद बोलते हुए, वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने जोर देकर कहा कि जब प्रधानमंत्री के नेतृ त्व वाली निर्वाचित सरकार को परमाणु बटन सौंपने का भरोसा किया जा सकता है, तो एक अच्छे मुख्य आयुक्त या चुनाव आयोग के चयन के मामले में ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता। Parliament:

उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि जब विधायिका ने अपनी बुद्धिमत्ता से एक ऐसा कानून पारित किया है जिसमें मुख्य न्यायाधीश को शामिल नहीं किया गया है, तो न्यायपालिका को हर चीज में क्यों शामिल किया जाना चाहिए।प्रसाद ने दावा किया कि वेणुगोपाल भी इस बात से सहमत थे कि सर्वोच्च पीठ द्वारा प्रस्तावित चयन पैनल केवल एक अंतरिम व्यवस्था थी। Parliament:

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