Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में विपक्ष ने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मुसलमानों के लिए निर्धारित पांच प्रतिशत आरक्षण रद्द किए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को बुधवार को ‘‘अल्पसंख्यक विरोधी’’ करार दिया। कांग्रेस की राज्य कार्यसमिति के पूर्व सदस्य नसीम खान ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने ये कदम उठाकर अन्याय किया है, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा कि बीजेपी अपनी पार्टी और सहयोगियों के मुस्लिम नेताओं को महत्व नहीं देती। Maharashtra Politics:
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कांग्रेस की मुंबई इकाई की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि मुसलमानों के लिए निर्धारित पांच प्रतिशत आरक्षण रद्द करने का महाराष्ट्र सरकार का फैसला ‘‘लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह’’ है और इससे यह समुदाय मुख्यधारा से दूर हो जाएगा।महायुति में बीजेपी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और शिवसेना शामिल हैं। खान ने यहां तिलक भवन में संवाददाताओं से कहा कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समुदाय के वर्गों के लिए आरक्षण खत्म करने का फैसला ‘‘बेहद गलत’’ है और ये अल्पसंख्यकों को विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के अवसरों से वंचित करेगा।
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उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने मुस्लिम आरक्षण देने के लिए 2014 में एक अध्यादेश जारी किया था।खान ने कहा, ‘‘इसके बाद देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया और बंबई उच्च न्यायालय द्वारा शिक्षा में पांच प्रतिशत आरक्षण के लिए अंतरिम राहत दिए जाने के बाद भी इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं किया गया।’’उन्होंने कहा कि 2014-15 के शैक्षणिक वर्ष के लिए आरक्षण लागू किया गया था, लेकिन बीजेपी सरकार द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद इसे बाद में जारी नहीं रखा गया। खान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्व सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के लिए शुरू की गई कई कल्याणकारी योजनाएं बंद कर दी गई हैं।Maha rashtra Politics:
उन्होंने दावा किया कि छात्रों के लिए छात्रवृत्तियां घटा दी गई हैं और सालाना करीब 90 करोड़ रुपये की जरूरत के मुकाबले केवल 20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। कांग्रेस नेता ने विद्यालयों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र देने में अनियमितताओं का भी दावा किया।उन्होंने कहा, ‘‘कुछ बड़े शिक्षण संस्थानों सहित करीब 70 से 75 विद्यालयों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र दिए गए हैं। हमें पता चला है कि हर प्रमाणपत्र के लिए पांच से 10 लाख रुपये वसूले गए। सरकार को इन प्रमाणपत्रों को रद्द करना चाहिए और अपराध जांच विभाग (सीआईडी) या विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच के आदेश देने चाहिए तथा संबंधित अधिकारियों को निलंबित करना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों में केवल मुसलमान ही नहीं, बल्कि जैन, सिख एवं पारसी भी शामिल हैं और सरकार को ऐसे सभी समुदायों के लिए विकास के समान अवसर सुनिश्चित करने चाहिए। उन्होंने सरकार को ‘‘अल्पसंख्यक विरोधी’’ बताया।Maharashtra Politics:
गायकवाड़ ने कहा, ‘‘इस प्रक्रिया को मजबूत करने के बजाय, सरकार ने उच्च न्यायालय की अंतरिम रोक के आदेशों और अध्यादेश की अवधि समाप्त होने का हवाला देकर पहले की प्रक्रियाओं को रद्द कर दिया है। एक तरफ बीजेपी ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करती है और दूसरी तरफ आरक्षण के लिए जरूरी दस्तावेज हासिल करने का रास्ता रोकती है।’’गायकवाड़ ने कहा कि बंबई उच्च न्यायालय ने मुस्लिम समुदाय के लिए शिक्षा में पांच प्रतिशत आरक्षण को बरकरार रखा था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे पूरी तरह लागू नहीं किया।Maharashtra Politics:
उन्होंने सत्तारूढ़ दलों शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से भी इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के लिए आरक्षण धर्म आधारित नहीं था, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लाभ के लिए था।उन्होंने कहा कि बीजेपी का रुख आरक्षण विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। क्रास्टो ने कहा कि ये फैसला साबित करता है कि बीजेपी अपनी पार्टी और सहयोगियों के मुस्लिम नेताओं को महत्व नहीं देती।Maharashtra Politics
उन्होंने कहा, ‘‘इससे ये भी दिखता है कि इन मुस्लिम नेताओं को बीजेपी से न्याय नहीं मिलेगा।’’पूर्ववर्ती कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत और मुसलमानों को पांच प्रतिशत आरक्षण देने के लिए एक अध्यादेश जारी किया था।मंगलवार को जारी एक शासकीय आदेश (जीआर) के अनुसार, विशेष पिछड़ा वर्ग (ए) के अंतर्गत आने वाले सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समूह के लिए सरकारी, अर्ध-सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में पांच प्रतिशत आरक्षण से संबंधित सभी पिछले निर्णय और अध्यादेश रद्द कर दिए गए हैं। Maharashtra Politics:
