Health Tips: बच्चों की थाली में रोज पहुंच रहा पैकेट वाला खाना अब उनकी सेहत ही नहीं, दिमाग और स्वभाव भी बिगाड़ रहा है। नई रिसर्च में सामने आया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड यानी UPF बच्चों में याददाश्त कमजोर कर रहा है और उन्हें चिड़चिड़ा, गुस्सैल बना रहा है। वजह है पेट और दिमाग का वो कनेक्शन जिसके बारे में अब तक कम बात हुई।
दरअसल, बच्चों को खुश करने के लिए हम जो चिप्स, नूडल्स, पिज्जा, बर्गर, केक और पैक्ड जूस देते हैं, वहीं उनकी मेंटल हेल्थ का दुश्मन बन रहा है। रिसर्च के नतीजे चौंकाने वाले हैं। स्टडी में पाया गया कि 3 साल की उम्र में ज्यादा UPF खाने वाले बच्चों में 5 साल की उम्र तक डर, एंग्जायटी, हाइपरएक्टिविटी और गुस्से की शिकायत ज्यादा देखी गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्री-स्कूल के साल बच्चे के दिमागी विकास के लिए सबसे अहम होते हैं और इसी उम्र में खानपान की आदतें बनती हैं। Health Tips
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Health Tips- UPF आंतों के माइक्रोबायोम यानी गुड बैक्टीरिया को बिगाड़ देता है। इससे शरीर में सूजन बढ़ाने वाले तत्व खून में पहुंचते हैं और ‘न्यूरोइन्फ्लेमेशन’ पैदा करते हैं। ये सूजन सीधे दिमाग पर असर करती है। इससे शॉर्ट-चेन फैटी एसिड कम बनते हैं जो याददाश्त, सीखने और इमोशन कंट्रोल के लिए जरूरी होते हैं। चूहों पर हुई स्टडी में भी पाया गया कि जंक फूड डाइट से उनकी मेमोरी इतनी खराब हुई कि हेल्दी डाइट पर लौटने के बाद भी असर खत्म नहीं हुआ। Health Tips
गौर करने वाली बात ये है कि हमारा पेट और दिमाग आपस में जुड़े हैं। UPF में मौजूद इमल्सीफायर, आर्टिफिशियल कलर, हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप आंतों की लाइनिंग कमजोर कर देते हैं। इससे सेरोटोनिन और BDNF जैसे केमिकल गड़बड़ा जाते हैं जो मूड और मेमोरी के लिए जरूरी हैं। साथ ही, ज्यादा शुगर और सैचुरेटेड फैट दिमाग में सूजन बढ़ाते हैं। इसके अलावा UPF वो खाना है जो फैक्ट्री में कई तरह के एडिटिव, प्रिजर्वेटिव, इमल्सीफायर, आर्टिफिशियल फ्लेवर डालकर बनाया जाता है। जैसे- पैक्ड चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, इंस्टेंट नूडल्स, पैक्ड केक, रेडी-टू-ईट मील, पैक्ड ब्रेड, फ्लेवर्ड सीरियल। विशेषज्ञों की मानें तो अगर बच्चे की डाइट में सिर्फ 10% UPF की कैलोरी हटाकर फल, सब्जी, दाल जैसे मिनिमली प्रोसेस्ड फूड दे दें, तो बिहेवियर की दिक्कतें कम हो सकती हैं।
