Dream World: आंख बंद करते ही आप अचानक किसी अनजान शहर में हैं… या बचपन के स्कूल में बिना होमवर्क के पहुंच गए… या फिर किसी का पीछा कर रहे हैं और पैर भारी हो गए। सुबह उठकर हम सोचते हैं- ये सब दिमाग में आया कहां से? सपने… हर इंसान देखता है। साइंस कहता है हम रात में 4 से 6 बार सपने देखते हैं, लेकिन 95% सपने उठते ही भूल जाते हैं। तो आखिर ये सपनों की दुनिया बनती कैसे है और इसका मकसद क्या है? आज इसी रहस्य से पर्दा उठाते हैं।
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नींद कोई स्विच ऑफ बटन नहीं है। नींद के 4 स्टेज होते हैं। शुरुआती 3 स्टेज ‘नॉन-REM’ नींद हैं, जहां बॉडी रिपेयर होती है। असली खेल चौथे स्टेज में शुरू होता है- REM स्लीप यानी ‘रैपिड आई मूवमेंट’ स्लीप। ये वो स्टेज है जब आपकी बंद पलकों के नीचे आंखें तेजी से इधर-उधर घूमती हैं। दिल की धड़कन और सांस तेज हो जाती है। और सबसे जरूरी- आपका दिमाग लगभग जागते हुए इंसान जितना एक्टिव हो जाता है। 90% जिंदा, रंगीन और अजीबोगरीब सपने इसी REM स्लीप में आते हैं। पूरी रात में हम 4-5 बार REM साइकिल में जाते हैं। हर बार REM का समय बढ़ता जाता है। इसीलिए सुबह के वक्त वाले सपने सबसे लंबे और याद रहते हैं। Dream WorldDream World
लेकिन दिमाग इतनी मेहनत क्यों करता है? साइंस की बड़ी थ्योरी हैं- दिनभर हमारा दिमाग लाखों चीजें देखता और सुनता है। REM नींद में हिप्पोकैंपस उन यादों को छांटता है। जरूरी जानकारी लॉन्ग-टर्म मेमोरी में सेव होती है, बेकार डिटेल डिलीट हो जाती है। सपने इसी ‘डेटा क्लीनिंग’ का बाय-प्रोडक्ट हैं। इसीलिए एग्जाम से पहले पढ़कर सोना फायदेमंद माना जाता है। दिन में जो गुस्सा, डर, दुख हम दबा देते हैं, एमिग्डाला रात में सपनों के जरिए उसे रिलीज करता है। ये ब्रेन की ‘ओवरनाइट थेरेपी’ है। इसी वजह से ट्रॉमा या स्ट्रेस में डरावने सपने बढ़ जाते हैं। हमारे पूर्वजों को जंगल में सर्वाइव करना था। इवोल्यूशन ने दिमाग को सपने में ‘खतरे की मॉक ड्रिल’ कराना सिखाया। गिरना, पीछा किया जाना, अटैक होना… ये ब्रेन आपको असल खतरे के लिए तैयार करता है।
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Dream World- जब आप जागते हैं तो दिमाग लॉजिकल सोचता है। सपने में ‘डिफॉल्ट मोड नेटवर्क’ एक्टिव होता है जो बिना रोक-टोक के आइडिया जोड़ता है। पॉल मैकार्टनी को ‘Yesterday’ की धुन, मेंडेलीव को पीरियोडिक टेबल का आइडिया सपने में ही आया था। REM में ब्रेन-स्टेम रैंडम इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजता है। दिमाग का ‘सोचने वाला हिस्सा’ यानी कॉर्टेक्स इन बेतरतीब सिग्नल्स को एक कहानी में पिरोने की कोशिश करता है। इसलिए सपने इतने अजीब होते हैं- उड़ता हुआ हाथी, बोलने वाली मछली।
सबसे कॉमन सपनें
परफॉर्मेंस एंग्जायटी- आप जॉब में हैं फिर भी ये सपना आएगा। इसका मतलब लाइफ में किसी ‘टेस्ट’ से डर।
दांत टूटना/गिरना- कॉन्फिडेंस की कमी, उम्र बढ़ने का डर, या कम्युनिकेशन में दिक्कत। दांत ‘पावर और लुक’ से जुड़े हैं।
नग्न होकर पब्लिक में होना- वल्नरेबिलिटी का डर। आपको लगता है लोग आपकी ‘असलियत’ देख लेंगे।
पीछा किया जाना- आप किसी इमोशन, कर्ज, या जिम्मेदारी से भाग रहे हैं जिसका सामना नहीं करना चाहते।
उड़ना- आजादी, कंट्रोल, या किसी समस्या से ऊपर उठने की ख्वाहिश। अगर उड़ने में दिक्कत हो तो मतलब लाइफ में रुकावट है।
बता दें, “अगर रोज एक ही डरावना सपना आए, नींद बार-बार टूटे, या दिन में नींद-सुस्ती रहे, तो ये REM स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर या PTSD हो सकता है। नॉर्मल सपना भूल जाना सही है, लेकिन सपने की वजह से जिंदगी डिस्टर्ब हो तो डॉक्टर से जरुर संपर्क करें।”
