Kerala: सात जुलाई को प्रस्तावित अनाक्कम्पोयिल–कल्लाडी–मेप्पाडी ट्विन टनल परियोजना के निर्माण स्थल पर हुए जानलेवा भूस्खलन ने इस परियोजना की पर्यावरण के लिहाज से व्यवहार्यता पर बहस को फिर से शुरू कर दिया है।वायनाड और कोझिकोड के बीच संपर्क बेहतर करने वाली इस सुरंग को कई लोग जिले के लिए एक लंबे समय के समाधान के तौर पर देखते हैं। Kerala:
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जाने क्या है पूरा मामला ?
ऐसा इसलिए क्योंकि भूस्खलन और खराब मौसम के दौरान जिले का संपर्क अक्सर बाकी जगहों से टूट जाता है। हालांकि, वे इस बात से सहमत हैं कि इतने बड़े पैमाने पर परियोजना शुरू करने से पहले इसकी बारीकी से वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए, क्योंकि इससे पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील पश्चिमी घाट पर और ज्यादा दबाव पड़ सकता है।इस हादसे से पर्यावरण समूहों की चिंताओं को बल मिलता है। उनकी लंबे समय से यह दलील रही है कि इस इलाके की नाजुक जमीन बड़े पैमाने पर खुदाई के लिए उपयुक्त नहीं है।Kerala:
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वायनाड में भूस्खलन से मची तबाही
वायनाड में वायनाड में भूस्खलन से मची भारी तबाही। बता दें कि भूस्खलन वायनाड टनल कंस्ट्रक्शन एरिया और मीनाक्षी ब्रिज के पास हुआ। ब्रिज के पास पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा सड़क पर और पास की नदी में गिर गया। यह हादसा तब हुआ जब मज़दूर टनल बनाने में लगे थे।
इलाके की पारिस्थितिकी बार-बार मुश्किलें खड़ी कर रही है। ऐसे में वायनाड आज एक ऐसी जगह पर खड़ा है, जहा भरोसेमंद संपर्क और नाज़ुक पश्चिमी घाटों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।हालांकि कल्लाडी निर्माण स्थल पर हाल ही में हुआ भूस्खलन एक कड़ी चेतावनी है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विकास पर असर न पड़े।Kerala:
