Kanwar Yatra: कांवड़ बांस के सजे-धजे वे डंडे होते हैं जिनके दोनों सिरों पर पवित्र जल के दो पात्र बंधे होते हैं और जिन्हें कांवड़िए अपने कंधों पर पूरे श्रद्धाभाव से उठाते हैं। ये कांवड़ बेहद रचनात्मक और शानदार हो सकते हैं। इसका अंदाजा कांवड़ियों के कंधों पर इस साल दिख रहे बेहतरीन डिजाइन के कांवड़ देखकर लगाया जा सकता है। कई कांवड़िये विशाल आकार के कांवड़ ले जा रहे हैं, जो भगवान शिव के प्रति उनकी गहरी आस्था और अटूट भक्ति को दिखाता है। Kanwar Yatra
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर समेत कांवड़ यात्रा मार्ग में पड़ने वाले शहरों और कस्बों के लोगों को इन कांवड़ों का अंदाज भा रहा है। कांवड़ियों के आराम और सेहत को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जगहों पर बनाए गए शिविरों को बहुत सोच-समझकर डिजाइन किया गया है। इनमें काम की चीजों के साथ-साथ आकर्षक सजावट का भी ध्यान रखा गया है।
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सहारनपुर में एक शिविर ऐसा भी है जहां थके-हारे कांवड़ियों को खाना, आराम करने की जगह और दूसरी जरूरी सुविधाएं दी जा रही है। साथ ही ये सरकार के प्लास्टिक-मुक्त रहने के नियमों का भी पालन करता है। Kanwar Yatra
हर साल लाखों कांवड़िए हरिद्वार और नदी के किनारे बसे दूसरे शहरों से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गृह नगरों के शिव मंदिरों में चढ़ाने जाते हैं। इस यात्रा को सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए यात्रा मार्ग में किए जाने वाले व्यापक इंतजाम एक अहम हिस्सा बन गए हैं। इस साल 30 जुलाई को शुरू हुई कांवड़ यात्रा 11 अगस्त को खत्म होगी।
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