Delhi: भारतीय जनता पार्टी ने 7.8% की जीडीपी विकास दर को वैश्विक संकटों के बीच भारत के आर्थिक प्रबंधन की एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की बढ़त: बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जब गल्फ क्राइसिस, युद्ध और सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण दुनिया के बड़े देश संकट से जूझ रहे हैं, तब भारत 7.8% की दर से आगे बढ़ रहा है।2013 बनाम वर्तमान दौर: रविशंकर प्रसाद ने याद दिलाया कि 2013 में यूपीए सरकार के दौरान देश ‘फ्रेजाइल फाइव’ (Fragile Five) में शामिल था और पॉलिसी पैरालिसिस का शिकार था। मोदी सरकार की नीतियों के कारण देश आज ‘मेजर इकॉनमी’ बनकर उभरा है।Delhi:
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राहुल गांधी से माफी की मांग: रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुराने बयानों (जिसमें उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकॉनमी’ और ‘आर्थिक सुनामी आने वाला’ बताया था) का वीडियो दिखाते हुए तीखा हमला बोला,। बीजेपी ने कहा कि राहुल गांधी देश का मनोबल तोड़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को कलंकित करने का काम करते हैं, इसलिए उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।Delhi:
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वही कांग्रेस पार्टी ने जीडीपी के आंकड़ों को जमीनी हकीकत से दूर और भ्रामक करार दिया है। पूर्व बैंक अधिकारी और कांग्रेस नेता सलमान सोज़ ने कहा कि देश का आम नागरिक जीडीपी के आंकड़े नहीं, बल्कि अपनी दैनिक समस्याओं को जीता है। महंगाई और डिफ्लेटर का डेटा खेल:
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि 7.8% की विकास दर को वास्तविक (Real GDP) दिखाने के लिए मुद्रास्फीति (Inflation Deflator) को केवल 2.3% आंका गया है, जबकि खुदरा और खाद्य महंगाई कहीं अधिक है।
बेरोजगारी और युवाओं का संकट: सलमान सोज़ ने पीएलएफएस (PLFS) और नीति आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 15 से 29 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी दर 16% है और देश में लगभग 8 करोड़ ऐसे युवा हैं जो न पढ़ाई कर रहे हैं और न नौकरी।
निजी निवेश और एफडीआई में गिरावट: सलमान सोज़ ने सरकार से सवाल किया कि यदि अर्थव्यवस्था इतनी ही बेहतर है, तो कॉर्पोरेट मुनाफा बढ़ने के बावजूद प्राइवेट सेक्टर निवेश क्यों नहीं कर रहा?
सरकारी नारों पर सवाल: कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘वेडिंग इन इंडिया’ जैसे नारों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मैन्युफैक्चरिंग का शेयर घटा है और चीन के साथ व्यापार घाटा $112 बिलियन तक पहुंच गया है। जाहिर है एक तरफ जहां सत्ता पक्ष इन आंकड़ों को देश के आर्थिक सामर्थ्य और मोदी सरकार की नीतियों की जीत मान रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे आम जनता की आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और महंगाई को छिपाने वाला ‘आंकड़ों का मायाजाल’ बता रहा है।बहरहाल अब यह देखना अहम होगा कि आने वाले समय में 7.8% की यह आर्थिक वृद्धि आम नागरिक की जेब और रोजगार के अवसरों में कितना बदलाव ला पाती है।
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