Delhi: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में आज 13 से 19 सितंबर 2026 तक केप टाउन, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित होने वाले 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन की तैयारियों को लेकर एक उच्च-स्तरीय ब्रीफिंग बैठक संपन्न हुई। Delhi:
Read Also: खटीमा गोलीकांड की बरसी पर शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि, सीएम धामी ने किया नमन
बैठक को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भूमिका पर विशेष जोर दिया।बिरला ने सभी माननीय सदस्यों और महिला प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे निर्धारित सत्रों और कार्यशालाओं में सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने कहा कि चर्चाओं के दौरान प्रभावी ढंग से अपने विचार रखें, ताकि भारत के राष्ट्रीय हितों और दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत एवं संरक्षित किया जा सके। Delhi:
बिरला ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि इस प्रकार के वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी से हमारी संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का दायरा और अधिक मजबूत होता है। साथ ही, उन्होंने सभी प्रतिनिधियों को यह भी निर्देश दिया कि वे सम्मेलन के दौरान निर्धारित सभी बैठकों और वार्ताओं में समयबद्धता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखें, जिससे देश का प्रतिनिधिमंडल एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत कर सके। Delhi:
इस सम्मेलन का मुख्य विषय (Conference Theme) “Strengthening International Law and Parliamentary Democracy in a Changing World Order: Commonwealth Leadership” निर्धारित किया गया है, जिसके तहत वैश्विक परिदृश्य पर संसद की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल के लिए छह प्रमुख सीपीसी (CPC) कार्यशालाओं के एजेंडे को रेखांकित किया गया। इन कार्यशालाओं में विविध अर्थव्यवस्थाओं में समावेशी और निष्पक्ष व्यापार, सुलभ संसद एवं दिव्यांगजनों का समावेशन, जलवायु अनुकूलन और लचीलापन, संसदों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वर्तमान अनुप्रयोग, मानवाधिकारों की रक्षा और पश्च-विधायी संवीक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।Delhi:
मुख्य सत्रों के अतिरिक्त, सम्मेलन में युवाओं की सहभागिता पर केंद्रित “Rebuilding Youth Trust and Participation in Democracy” विषयक युवा गोलमेज बैठक और सीपीए महासभा की डिबेट भी आयोजित होगी। इसके साथ ही, 10वें राष्ट्रमंडल महिला संसद सदस्य (CWP) सम्मेलन के अंतर्गत “Making Gender Sensitivity an Institutional Mandate” थीम पर आधारित चार विशेष कार्यशालाएँ भी इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेंगी।
बैठक के अंत में लोकसभा के महासचिव और संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सम्मेलन की रूपरेखा, प्रशासनिक और सामरिक विषयों से जुड़े विस्तृत विवरण सभी उपस्थित सदस्यों के सामने प्रस्तुत किए, जिससे सभी प्रतिनिधियों को अपनी सहभागिता की रूपरेखा स्पष्ट हो गई है।
ब्रीफिंग बैठक में भाग लेने वाले पीठासीन अधिकारियों में कोये मोशेनू राजू, सभापति, आंध्र प्रदेश विधान परिषद; रंजीत कुमार दास, अध्यक्ष, असम विधानसभा; प्रेम कुमार, विधानसभा अध्यक्ष, बिहार विधानसभा; विजेंद्र गुप्ता, विधानसभा अध्यक्ष, दिल्ली विधानसभा, और मोहन सिंह बिष्ट, उपाध्यक्ष, दिल्ली विधानसभा; रवींद्र नाथ महतो, विधानसभा अध्यक्ष, झारखंड विधानसभा; जी. एस. पाटिल, विधानसभा अध्यक्ष, कर्नाटक विधानसभा, और सलीम अहमद, सभापति, कर्नाटक विधान परिषद; तिरुवंचूर राधाकृष्णन, विधानसभा अध्यक्ष, केरल विधानसभा; प्रो. राम शिंद, सभापति, महाराष्ट्र विधान परिषद, और एडवोकेट राहुल नार्वेकर, विधानसभा अध्यक्ष, महाराष्ट्र विधानसभा; थॉमस ए. संगमा, विधानसभा अध्यक्ष, मेघालय विधानसभा, और लिमिसन डी. संगमा, उपाध्यक्ष, मेघालय विधानसभा; लालबियाकजामा, विधानसभा अध्यक्ष, मिजोरम विधानसभा; श्रीमती सुरमा पाढ़ी, विधानसभा अध्यक्ष, ओडिशा विधानसभा, और भवानी शंकर भोई, उपाध्यक्ष, ओडिशा विधानसभा; सरदार कुलतार सिंह, विधानसभा अध्यक्ष, पंजाब विधानसभा, और सरदार जय किशन सिंह, उपाध्यक्ष, पंजाब विधानसभा; मिंगमा नोरबू शेर्पा, विधानसभा अध्यक्ष, सिक्किम विधानसभा; गद्दम प्रसाद कुमार, विधानसभा अध्यक्ष, तेलंगाना विधानसभा, गुथा सुखेंद्र रेड्डी, सभापति, तेलंगाना विधान परिषद, और डॉ. बांदा प्रकाश, उपसभापति, तेलंगाना विधान परिषद; राम प्रसाद पॉल, उपाध्यक्ष, त्रिपुरा विधानसभा; श्रीमती रितु खंडूरी भूषण, विधानसभा अध्यक्ष, उत्तराखंड विधानसभा; सतीश महाना, विधानसभा अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश विधानसभा, और कुंवर मानवेन्द्र सिंह, सभापति, उत्तर प्रदेश विधान परिषद; और रथिन्द्र बोस, विधानसभा अध्यक्ष, पश्चिम बंगाल विधानसभा शामिल थे।
